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  • रुद्रप्रयाग

भक्तों के आक्रोश के बीच टूटा गेट, परिक्रमा के बाद गद्दीस्थल पर विराजमान हुई ऋषि अगस्त्य मुनि की डोली

RNS INDIA NEWS 15/01/2026
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रुद्रप्रयाग। गुरुवार को 15 वर्षों बाद निकली ऋषि अगस्त्य मुनि महाराज की दिवारा यात्रा के दूसरे दिन भी हालात तनावपूर्ण बने रहे। क्षेत्र भ्रमण पर निकली डोली जब अगस्त्यमुनि के मैदान स्थित गद्दीस्थल पहुंची, तो वहां लगे गेट के कारण अंदर प्रवेश नहीं कर सकी। प्रशासन की ओर से गेट न हटाए जाने पर आक्रोशित भक्तों ने स्वयं ही ड्रिल मशीन और हथौड़ों की मदद से गेट तोड़ दिया। इस दौरान डोली करीब पांच घंटे तक हाईवे पर ही रुकी रही, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई।

मकर संक्रांति के अवसर पर 15 वर्षों बाद दिवारा यात्रा पर निकली डोली गुरुवार को दोबारा क्षेत्र भ्रमण के लिए बाहर निकली थी। अगस्त्यमुनि मैदान में लगे गेट के कारण डोली को रोकना पड़ा। इससे एक दिन पहले भी इसी वजह से डोली को लौटना पड़ा था। भक्तों का कहना था कि यह पारंपरिक यात्रा मार्ग है, लेकिन यहां निर्माण कर गेट लगा दिया गया। प्रशासन से कई बार गेट हटाने की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने खुद गेट को तोड़ना शुरू कर दिया।

करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद शाम चार बजे गेट टूट सका। इसके बाद डोली ने अगस्त्यमुनि मैदान की परिक्रमा की और गद्दीस्थल पर विराजमान हुई। यहां ऋषि अगस्त्य मुनि महाराज ने भक्तों की कुशलक्षेम जानी और संध्या समय डोली पुनः मंदिर के लिए प्रस्थान कर गई।

डोली के हाईवे पर रुकने और गेट तोड़े जाने की कार्रवाई के चलते अगस्त्यमुनि बाजार में दोपहर साढ़े बारह बजे से भारी जाम लग गया। केदारनाथ और रुद्रप्रयाग की ओर जाने वाले वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जाम में एंबुलेंस भी घंटों फंसी रही। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को तिलवाड़ा और गंगानगर की ओर से वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ना पड़ा। शाम चार बजे के बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हो सका।

इसी बीच नगर क्षेत्र में दिनभर बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित रहने से आम जनजीवन भी प्रभावित रहा। ऑनलाइन कामकाज, व्यापार और छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ा। पानी की किल्लत के चलते होटल व्यवसायियों और स्थानीय लोगों को प्राकृतिक स्रोतों से पानी लाना पड़ा। देर शाम बिजली आपूर्ति तो बहाल हो गई, लेकिन पानी की समस्या बनी रही, जिससे लोगों की परेशानी कम नहीं हो सकी।

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