
देहरादून। परिवहन निगम की जमीनें अब उसकी आर्थिकी सुधारने का एक बड़ा जरिया बनेंगी। इसके लिए फिलहाल पुराने दिल्ली बस अड्डे, वर्कशॉप और गांधी रोड स्थित आरएम ऑफिस की जमीनों का अधिग्रहण करने की तैयारी है। इसकी एवज में इन्हें बाजार भाव से दोगुनी राशि की जाएगी।
उत्तराखंड परिवहन निगम का गठन वर्ष 2003 में हुआ था। इस दौरान निगम को उत्तर प्रदेश से पुरानी बसों का बेड़ा मिला था। इसके साथ ही उसके हिस्से में पुरानी देयता भी आई थी। इससे ही निगम ने अपनी शुरुआत की। इससे स्थिति यह बनी कि निगम कभी भी घाटे से नहीं उबर पाया। सरकार ने निगम को मजबूत करने के लिए कई प्रयास किए। बसों की खरीद के लिए मदद की, यहां तक कि ऋण भी दिलाया। इसके बावजूद निगम प्रबंधन की लचर कार्यशैली के चलते निगम की व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पाई। स्थिति यह बनी कि निगम को हर बार अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार का मुंह ताकना पड़ रहा है। कोरोना काल में निगम का हाल और भी खराब हुआ। बसों का संचालन न होने के कारण निगम कोई कोई आय नहीं हुई। ऐसे में निगम के सामने कर्मचारियों को वेतन देने तक के लाले पड़ गए। सरकार द्वारा इसी माह निगम को तकरीबन साढ़े दस करोड़ रुपये देने के बावजूद कर्मचारियों का तीन माह का वेतन बकाया चल रहा है। निगम की इस स्थिति को देखते हुए कुछ समय पहले शासन में एक बैठक हुई। इस बैठक में निर्णय लिया गया कि निगम की देहरादून की तीन जमीनों को मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण खरीदेगा। ये सारी जमीनें शहर के महत्वपूर्ण स्थानों पर हैं, ऐसे में निगम को इनकी बाजार भाव की दोगुनी कीमत दी जाएगी। इससे निगम की आर्थिकी काफी सुधर सकती है। हालांकि, इसके लिए निगम बोर्ड के माध्यम से प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा जाएगा। परिवहन निगम के महाप्रबंधक संचालन दीपक जैन का कहना है कि इस संबंध में शासन में विचार-विमर्श हुआ है। जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।

