700 लोगों ने उठाया एक्यूपंक्चर और प्राकृतिक चिकित्सा का लाभ

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आयोजित सात दिवसीय निशुल्क एक्यूपंक्चर और प्राकृतिक चिकित्सा शिविर का 700 से अधिक लोगों ने लाभ उठाया।
रविवार को चिकित्सा शिविर के अंतिम दिन का शुभारंभ स्वामी चिदानंद सरस्वती ने किया। उन्होंने कहा कि सेवा से मन की शान्ति प्राप्त होती है। सेवा से न केवल दूसरों को लाभ प्राप्त होता है, बल्कि उनके दिलों में हमेशा के लिये एक खास जगह बन जाती है। चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से चिकित्सक रोगियों को संकट और कष्टों से उबारते हैं, इसलिये सेवा का धर्म कभी नहीं छोड़ना चाहिये। सेवा के माध्यम से सभी का दिल जीता जा सकता है। सेवा, समानता और गरिमा के मूल्यों का जीवन में होना अत्यंत आवश्यक है। कहा कि शिविर में अमरिका से आये 14 चिकित्सकों ने लोगों का उपचार किया है।
एक्यूपंक्चर टीम की प्रमुख सामी रैंक ने कहा कि उन्होंने परमार्थ निकेतन में तीसरी बार आकर कैम्प किया है। कहा कि कैम्प के दौरान अधिकांश रोगी तनाव, थायराइड, हाइपरटेंशन और स्ट्रोक के थे। परमार्थ निकेतन अपने आप में एक दिव्य स्थान है, यहां आकर सेवा के साथ-साथ साधना का भी लाभ मिलता है। यहां की गंगा आरती अद्भुत और अलौकिक है।
डिवाइन शक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि अमेरिका के सामी रैंक, लौरा मार्टेल, रीगन पेनेल, लिज रॉस, यासमीन सहहत, एशले जिमेनेज, चेरी जिमर, टायलर हॉलैंड, कैली विलियम्स, विक्टोरिया एरोको, च्लोए ग्रीनहालघ, एलन चुंग, अमांडा वैन एर्ट और सहायक टीम के सदस्य मिशेला हॉलैंड, आनंद ब्रावो, रयान जिमर, आयला मार्टेल ने उत्कृष्ट योगदान दिया। टीम के सदस्य अमरिका के एरिज़ोना, टेक्सास आदि राज्यों से आए हैं।


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