
भोपाल (आरएनएस)। राजधानी सहित प्रदेशभर की जिन शराब दुकानों के ठेके 31 मार्च तक नहीं होंगे, उसके लिए राज्य सरकार ने खुद चलाने की तैयारिया शुरु कर दी हैं। इसके लिए सभी कलेक्टरों को अल्प अवधि की टेंडर व्यवस्था और दुकान संचालन के लिए आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से मेन पॉवर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। इधर, भोपाल जिले की बची हुई 22 ग्रुप की 58 शराब दुकानों को ठेके पर देने के लिए मंगलवार को छठवीं बार प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए शाम चार बजे के बाद ऑनलाइन टेेंडर खोले जाएंगे। असल में सरकार ने आबकारी नीति के तहत शराब दुकानों की रिजर्व प्राइज 20 फीसदी बढ़ा दी है। इस कारण ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया से दूरी बना रहे हैं। वे रिजर्व प्राइज कम करने के लिए टेेंडर नहीं भरकर सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार भी इन ठेकेदारों के दबाव में आने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि आबकारी विभाग ने 31 मार्च के बाद की स्थितियों से निपटने की तैयारी शुरु कर दी है। हालांकि सरकार का प्रयास है कि 31 मार्च तक बची हुई दुकानों के लिए ऑनलाइन नीलामी जारी रखी जाए। आबकारी आयुक्त ने सोमवार को सभी कलेक्टरों को वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए शराब दुकानों के संचालन के लिए पत्र लिखा है। इसके मुताबिक, वतमान में जिलों में शराब दुकानों के ठेके की प्रक्रिया जारी है। अधिकांश जिलों में इन दुकानों के ठेके नहीं हुए हैं। 31 मार्च तक सभी दुकानों के ठेके नहीं होने पर उसके विभागीय संचालन की स्थिति बन सकती है। पत्र में कहा है कि 31 मार्च के बाद ठेके जाने तक अधिक से अधिक राजस्व अर्जित करने के निर्देशित किया जाता है कि वर्ष 2022-23 के पूर्व के नियमों के सिलसिले में विभागीय संचालन अल्प अवधि टेंडर व्यवस्था एवं आउट सोर्स एजेंसी के माध्यम से मेन पावर की समुचित तैयारी रखें। इससे पहले राज्य सरकार ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि नीलामी प्रक्रिया में रिजर्व प्राइज से कम ऑफर देने वाले ठेकेदारों को अर्नेस्ट मनी लौटा दी जाए। जिन समूहों ने पूर्व में रिजर्व पइाज या उससे अधिक मूल्य की बोली लगाई है, उन्हें स्वीकार किया जाए। इसके अलावा शेष समूहों से प्राप्त उच्चतम ऑफर को स्टेंड बाय या होल्ड पर रखते हुए उन समूहों के लिए ई-टेंडर की प्रक्रिया की कार्यवाही की जाए। इधर चौथे और पांचवें चरण में होल्ड पर रखे गए उच्चतम ऑफरदाता के अतिरिक्त अन्य ठेकेदारों की अर्नेस्ट मनी वापस की जाए। वहीं, होल्ड पर रखे गए उच्चतम ऑफरदाता को उस समूह में शामिल होने के लिए अर्नेस्ट मनी की राशि के भुगतान की आवश्यकता नहीं होगी। जिले की शेष बची दुकानों के लिए आबकारी विभाग पांच बार प्रयास कर चुका है, लेकिन अब तक केवल 90 में से 32 दुकानों की ही नीलामी हो सकी। अभी भी 58 दुकानें बाकी हैं, जो शराब कारोबारियों के सिंडिकेट के कारण ठेके पर नहीं जा पा रही है। शनिवार को हुई आनलाइन टेंडर प्रक्रिया में भी एक भी शराब कारोबारी आगे नहीं आया था। असल में कारेाबारी दुकानों की प्राइज दर कम करने की मांग पर अड़े हैं। असल में उनका मानना है कि महंगी शराब दुकानें लेना उनके लिए घाटे का सौदा है। इसलिए बची दुकानों के ठेके लेने के लिए कारोबारी नीलामी के लिए ऑफर नहीं दे रहा है। इससे पहले विभाग पांच बार में 33 समूह की 90 शराब दुकानों को ठेके पर देने का प्रयास कर चुका है। लेकिन सिर्फ 32 दुकानों की नीलामी ही हो सकी है।

