
देहरादून(आरएनएस)। 13 वर्षीय नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के दोषी को पोक्सो कोर्ट ने 20 साल के कठोर कारावास और 70 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। पोक्सो जज मंजू सिंह मुंडे ने घटना की जानकारी होने के बावजूद सक्षम अधिकारी को सूचना न देने और मामला दबाने के जुर्म में पीड़िता की भाभी पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। मामले में एक सह आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। अदालत ने पीड़ित बालिका को तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने के भी निर्देश दिए हैं। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता किशोर कुमार ने बताया कि मामला त्यूनी क्षेत्र का है। वहां की एक किशोरी के माता-पिता नहीं हैं। घटना के वक्त भाई-भाभी ने दून में पढ़ाई के लिए आसरा ट्रस्ट के पास छोड़ा हुआ था। जून 2022 में कक्षा नौ की छात्रा छुट्टियों में अपने गांव आई थी। त्योहार के दौरान कमरे में अकेली देखकर पीड़िता के भाभी के भाई सर्वेश ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता ने अपनी भाभी को आपबीती बताई। लेकिन उसने बात दबा दी। नवंबर 2022 में छात्रा के आश्रय गृह आसरा ट्रस्ट में तबीयत बिगड़ने पर उसके गर्भवती होने का खुलासा हुआ। जिसके बाद 26 नवंबर 2022 को शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने जांच के बाद सर्वेश, अनिल और किशोरी की भाभी के खिलाफ कोर्ट में पोक्सो और संबंधित धाराओं में चार्जशीट फाइल की। न्यायालय में आदेश में अनिल को बरी कर दिया। वहीं सर्वेश को दुष्कर्म और पीड़िता की भाभी को घटना की सूचना छिपाने का दोषी पाया। इसलिए इन दोनों को दोषी माना गया।

