


अल्मोड़ा। श्री भुवनेश्वर महादेव मंदिर एवं रामलीला समिति कर्नाटक खोला की रामलीला का शुक्रवार को तिलपात्र और हवन के धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विधिवत समापन हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बीच आयोजित अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कर्नाटक खोला की रामलीला में भगवान श्रीराम के वनवास, भरत मिलाप, लंका विजय, रावण वध और अयोध्या वापसी जैसे प्रसंगों का मंचन किया गया। इन प्रसंगों के माध्यम से सत्य, धर्म, त्याग, भाईचारे और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया गया। रामलीला ने धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय संस्कृति और सामाजिक एकता को भी मजबूती प्रदान की। समिति के संयोजक बिट्टू कर्नाटक के नेतृत्व में इस वर्ष मंचन को अधिक आकर्षक बनाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं। मंच पर लगभग 20 फीट लंबी और 10 फीट ऊंची स्क्रीन के साथ आधुनिक ध्वनि व्यवस्था की गई। दर्शक दीर्घा को बेहतर बनाने के प्रयास भी किए गए, जिससे दर्शकों को रामलीला के प्रसंगों को देखने और समझने का बेहतर अनुभव मिला। रामलीला समिति की विशेषता यह है कि बिट्टू कर्नाटक के परिवार की चार पीढ़ियां इस परंपरा से जुड़ी रही हैं। परिवार के बुजुर्गों से लेकर नई पीढ़ी तक का जुड़ाव धार्मिक आस्था, पारिवारिक संस्कारों और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की मिसाल है। समिति का प्रयास रामलीला को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना भी है। तिलपात्र और हवन के अनुष्ठानों में बिट्टू कर्नाटक, सीमा कर्नाटक, देवेंद्र कर्नाटक, पंडित बृजेश कर्नाटक, तनोज कर्नाटक, मुख्य यजमान बद्री प्रसाद कर्नाटक, दीपा कर्नाटक, कमलेश कर्नाटक, हंसा दत्त कर्नाटक, कैलाश चंद्र तिवारी सहित कई लोग मौजूद रहे।



