
श्रीनगर (आरएनएस)। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में सोमवार को ऑपरेशन महादेव में मारे गए पहलगाम हमले के तीनों आतंकियों की पहचान हो गई है। मारे गए आतंकियों की पहचान उनको शरण देने वाले आरोपियों ने की है, जो इस समय राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की गिरफ्त में हैं। एनआईए अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों को कोट लखपत जेल ले जाने से पहले मुठभेड़ स्थल पर ले जाया गया और पुष्टि कराई गई थी। आरोपियों ने आतंकियों को अस्थायी शरण दी थी।
मृतकों में एक सुलेमान शाह उर्फ हाशिम मूसा है, जो पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड था। उसकी पहचान कल ही हो गई थी। दूसरे आतंकी की पहचान जिबरान के रूप में हुई है, जबकि तीसरा आतंकी हमजा अफगानी है। तीनों में एक का असली नाम हुबैब ताहिर है, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के खैगाला का निवासी है। तीनों आतंकियों को आरोपियों ने ढोक (अस्थायी आश्रय) में शरण दी थी। तीनों पाकिस्तानी नागरिक थे और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के सदस्य थे।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मूसा के साथ जिबरान और हमजा काफी समय से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय थे। हमजा और जिबरान ने 2024 में सोनमर्ग सुरंग हमले को भी अंजाम दिया था। मूसा पाकिस्तान की सेना के विशेष सेवा समूह (एसएसजी) का पूर्व पैरा-कमांडो था, लेकिन उसे बर्खास्त कर दिया था। बाद में वह एलईटी में शामिल हो गया। मूसा प्रशिक्षित पैरा कमांडो था और अपरंपरागत युद्ध और गुप्त अभियानों में माहिर था।
दाचीगाम इलाके के लिडवास में महादेव पहाड़ियों के जंगलों में आतंकियों के छिपे होने की गुप्त सूचना मिलने पर सेना ने ऑपरेशन महादेव शुरू किया था। सेना ने एक सैटेलाइट फोन ट्रांसमिशन और तकनीकी सिग्नल को इंटरसेप्ट करने के बाद ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाके पर काफी समय तक नजर रखी। इसके बाद सोमवार को तीनों को मार गिराया गया। आतंकियों के पास से 17 ग्रेनेड, एक एम-4 कार्बाइन, 2 एके-47 राइफलें बरामद की गई हैं।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में स्थित बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 निर्दोष पुरुष पर्यटकों को गोली मार दी थी। कुछ पर्यटक शादी के बाद पहली बार हनीमून पर पहुंचे थे। इस घटना के बाद भारत-पाकिस्तान तनाव बढ़ गया था।

