
ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश में नौकरी से निकाले जाने के नोटिस पर आउटसोर्स पर कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर भड़क गए। उन्होंने सेवा बरकरार रखने की मांग को लेकर एम्स परिसर में हंगामा कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मोर्चा संभाला। एम्स प्रशासन ने मामले में रुख स्पष्ट किया कि निकाले गए नर्सिंग ऑफिसरों को सिर्फ कोविडकाल के लिए रखा गया था। पशुलोक बैराज मार्ग स्थित एम्स में मंगलवार सुबह उस समय बवाल हो गया, जब आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से रखे गए 26 नर्सिंग ऑफिसर को नौकरी से निकाले जाने के नोटिस जारी होने की भनक लगी। एम्स परिसर में एकजुट हुए आउटसोर्स नर्सिंग ऑफिसरों ने एम्स प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। चेताया कि उनकी सेवा बहाल नहीं की तो उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। हंगामा बढ़ते देख एम्स प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए। आनन-फानन में पुलिस को बुलाया। मौके पर पहुंची पुलिस ने आंदोलनरत नर्सिंग ऑफिसरों को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन वे सेवा बहाली की मांग पर अड़े रहे। इस दौरान पुलिस की मौजूदगी में आक्रोशित नर्सिंग ऑफिसरों ने एम्स के प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता की, लेकिन समाधान नहीं निकला। एम्स के कानूनी सलाहकार प्रदीप पांडे ने बताया कि आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से रखे गए स्टाफ को पहले ही इसकी जानकारी होती है कि उनकी नौकरी अस्थाई है। बावजूद इसके विरोध करना तर्कसंगत नहीं है।
एम्स प्रशासन के आदेश पर जारी हुए नोटिस
नौकरी से निकाले जाने के नोटिस के बाद हंगामा कर रहे आउटसोर्स नर्सिंग ऑफिसरों ने आरोप लगाया कि आउटसोर्स कंपनी ने नोटिस एम्स प्रशासन के आदेश पर जारी किया है। नर्सिंग ऑफिसर पूजा ने बताया कि उनकी नियुक्ति सितंबर महीने में की गई और अब उन्हें नौकरी से निकाले जाने का नोटिस मिला है। जबकि आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से सैकड़ों नर्सिंग ऑफिसरों की तैनाती एम्स में की गई है। जो कि उनसे पहले से नौकरी कर रहे हैं। केवल 26 नर्सिंग ऑफिसर को ही टारगेट क्यों किया जा रहा है? नर्सिंग ऑफिसर रितेश कुमार ने बताया कि एम्स प्रशासन उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
