
अल्मोड़ा। द्वाराहाट क्षेत्र के एरासेरा गांव में शुक्रवार को किसानों के लिए सोयाबीन आधारित उत्पादों और कृषि यंत्रों के उपयोग पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना—कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी के तहत आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के निर्देशन में हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी देने के साथ ही सोयाबीन से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने के प्रति प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम में गांव के 21 किसानों, जिनमें 15 महिलाएं और 6 पुरुष शामिल थे, ने भाग लिया। प्रतिभागियों को सोयाबीन से टोफू (सोयापनीर), सोया दूध और सोया बड़ी बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने स्वयं इन उत्पादों को तैयार किया और उनकी विधि को समझा। साथ ही उन्हें संबंधित जानकारी के पर्चे भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में कृषि यंत्रों के उपयोग पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। विशेष रूप से विवेक मंडुवा थ्रेशर और धान थ्रेशर की कार्यप्रणाली, उपयोगिता और लाभों के बारे में बताया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि मंडुवा थ्रेशर के उपयोग से मड़ाई का कार्य तेजी से होता है और श्रम व समय की बचत होती है। इसकी क्षमता सामान्य फसल में 40 से 60 किलोग्राम प्रति घंटा तथा अच्छी गुणवत्ता की फसल में 60 से 80 किलोग्राम प्रति घंटा तक है। वहीं धान थ्रेशर की क्षमता लगभग 80 से 100 किलोग्राम प्रति घंटा बताई गई। कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने किसानों को नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

