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हाउस ऑफ हिमालय ब्रॉन्ड से बिकेगा दून का बासमती

RNS INDIA NEWS 10/12/2025
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देहरादून(आरएनएस)। दून बासमती के पुनर्जीवन में 200 से अधिक समूह की महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई है। 200 से अधिक कुंतल की खरीद की गई है।किसानों के खातों में 13 लाख से अधिक रुपये का भुगतान किया गया है। इससे किसानों की आर्थिकी में सुधार हुआ है। ग्राम उत्थान विभाग और कृषि विभाग किसानों द्वारा उगाई गई बासमती को उचित मुल्य पर खरीदकर उसे ब्रॉन्ड के तौर पर पेश करने की तैयारी कर रही है। सहसपुर और विकास नगर के किसानों ने दून बासमती की टाइप-3 की खेती कर उसे नई पहचान दिलाई है। धान की अच्छी उपज के लिए ग्राम उत्थान और कृषि विभाग की ओर से किसानों और महिलाओं के समूह को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार तक उपलब्ध कराया गया। खेती से लेकर प्रसंस्करण और बिक्री तक हर स्तर पर विभाग की सक्रिय भागीदारी से दून बासमती के उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार आया है। साथ ही उनकी आय में भी वृद्धि हुई है। ग्राम उत्थान विभाग ने सभी किसानों और महिलाओं के समूह से ₹65 प्रति किलो के हिसाब से 200 से अधिक क़ुतंल दून बासमती धान खरीदा है। इसका ग्राम उत्थान विभाग ने किसानों को 13 लाख से अधिक का भुगतान भी कर दिया गया है। ग्राम उत्थान द्वारा खरीदे गए दून बासमती को हिलान्स और हाउस ऑफ हिमालय के माध्यम से एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में जिला प्रशासन पहल कर रहा है। सीडीओ अभिनव शाह ने बताया कि इससे न केवल दून बासमती धान को पुनर्जीवन मिलेगा साथ ही स्थानीय समूह की महिला किसानों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। दून बासमती धान से निकलने वाले बाय प्रोडक्ट से आगामी दिनों में समूह की महिलाओं को खेती से प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग की सुविधा से रोजगार मिलेगा। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि वर्तमान समय में दून बासमती विलुप्त हो रही प्रजाति को पुनर्जीवित करने के संकल्प से इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया है। दून बासमती को पुनर्जीवित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा कार्य योजना बनाई गई। उन्होंने बताया कि सबसे पहले खेती करने वाले किसानों को चयनित किया गया। किसानों को क्लाइमेट चेंज के अनुसार प्रशिक्षण दिया गया। फसल के बाद चयनित किसानों को कृषि विभाग द्वारा सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। इससे दून बासमती धान को सर्टिफाइड किया जा सके। जिला परियोजना प्रबंधक रीप कैलाश भट्ट ने बताया कि दून बासमती का मूल्य 65 रुपए किलो तय किया गया था। इससे किसानों को भी अपनी फसल का सही दाम मिल सकेगा।

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