
देहरादून। शिक्षक को हमेशा सीखते रहना चाहिए। कोई भी हर कार्य में निपुण नहीं होता। नई शिक्षा नीति में तीन बातें महत्वपूर्ण हैं, सार्वभौमिकता, व्यवसायिकता ओर पेशेवर नजरिया। यह बात हिमालयी विवि के कुलपति प्रो. जेपी पचौरी ने कही। वे श्रीदेवसुमन विवि की ओर से आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। नई शिक्षा नीति एवं व्यवसायिक पाठ्यक्रम निर्माण एवं क्रियान्वयन विषय पर साईं इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज देहरादून में रविवार को कार्यशाला आयोजित हुई। प्रो. पचौरी ने कहा कि वर्तमान नीति के तहत 40 फीसदी तकनीकी स्नातक रोजगार के लिए फिट नहीं हैं। नीति में कुछ व्यवहार खामियां भी हैं। क्लस्टर नीति अपनाकर क्लस्टर मैटरिंग प्रणाली के माध्यम से इस नीति को सफल बनाया जा सकता है। मौलिक विचारों का सृजन अध्ययन से ही संभव है और शिक्षा नीति 2020 को सफल बनाने के ज्ञान का सर्जन आवश्यक है। शिक्षक को सदैव नई तकनीकी से अपडेट होना जरूरी है।
कुलसचिव प्रो. मोहन पंवार ने कहा कि व्यवसायिक पाठ्यक्रमों के निर्माण एवं क्रियान्वयन के लिए निजी संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। नई शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के लिए 70 फीसदी पाठ्यक्रम का कलेवर यूजीसी के अनुरूप एवं तीस फीसदी पाठ्यक्रम में क्षेत्रीय स्तर की अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार किया जाना है। इसमें गांव को गोद लिया जाना भी एक प्राथमिकता है। ऋषिकेश कॉलेज के कला संकाय के संकायध्यक्ष प्रो. डीसी गोस्वामी, भौतिक विज्ञान की प्रोफेसर डॉ. सुमित श्रीवास्तव, प्रो. गुलाटी, प्रो. उपाध्याय, प्रो. गुलशन कुमार ढींगरा, प्रो. राजमणि, सहायक परीक्षा नियंत्रक डॉ. हेमंत बिष्ट, उप कुलसचिव डॉ. हेम चंद्र भट्ट आदि मौजूद रहे।


