Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • राज्य
  • उत्तराखंड
  • देहरादून
  • ग्लूकोमा के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी दी
  • देहरादून

ग्लूकोमा के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी दी

RNS INDIA NEWS 18/03/2023
default featured image

ऋषिकेश। हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट के नेत्र रोग विभाग की ओर से ग्लूकोमा जागरूकता साप्ताहिक अभियान चलाया गया। इसमें लोगों को ग्लूकोमा के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी दी गई। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू धस्माना ने लोगों और रोगियों से ग्लूकोमा की वक्त पर जांच कराने की अपील की। शुक्रवार को नेत्र रोग विभाग की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में ऑप्टोमेट्री के छात्र-छात्राओं ने नाटक के माध्यम से काला मोतियाबिंद के लक्षण और इसकी पहचान की जानकारी दी। साथ ही लक्षण आने पर चिकित्सक की सलाह अनुसार इलाज के लिए प्रेरित किया। छात्र-छात्राओं ने पोस्टर प्रदर्शनी से भी अस्पताल की ओपीडी में आने वाले लोगों को मोतियाबिंद के विषय में जानकारी दी। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ.रेनू धस्माना ने कहा कि ग्लूकोमा को काला मोतिया भी कहते हैं। काला मोतिया के अधिकतर मामलों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते न ही दर्द होता है, इसलिए यह दृष्टिहीनता का एक प्रमुख कारण भी माना जाता है। काला मोतिया में हमारी आंखों की ऑप्टिक नर्व पर दबाव पड़ता है जिससे उन्हें काफी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने बताया परिवार में यदि किसी को ग्लूकोमा है तो अन्य सदस्यों में इसके होने की आशंका ज्यादा होती है। डॉ. हर्ष बहादुर ने कहा कि लोगों को 40 की उम्र पार करते ही साल में एक बार अपनी आंखों का चेकअप नेत्र विशेषज्ञ से करवाना चाहिए। ग्लूकोमा विशेषज्ञ डॉ. नीलम वर्मा ने कहा कि यदि परिवार में कोई भी सदस्य ग्लूकोमा से पीड़ित नहीं है, तब भी अपनी आंखों का चेकअप हर दो साल में एक बार जरूर करवाना चाहिए। ग्लूकोमा को जांचने के लिए कोई एक टेस्ट नहीं है, इसलिए भी मुश्किलें आती हैं। ग्लूकोमा को जांचने के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं। टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर ही ग्लूकोमा की पुष्टि की जाती है। यदि एक बार ग्लूकोमा से आंखों का नुकसान हो गया तो उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। मौके पर डॉ. अमित मैत्रेय, डॉ. सुखदीप बैंस, डॉ. उदित राज शर्मा आदि उपस्थित रहे।

शेयर करें..

Post navigation

Previous: राशिफल 18 मार्च
Next: प्रकाश पंत मार्ग बना फोटो-वीडियो शूट प्वाइंट

Related Post

default featured image
  • देहरादून

राज्य गठन के बाद बने फर्जी स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की जांच करे सरकार

RNS INDIA NEWS 14/01/2026 0
default featured image
  • देहरादून

भारतीय गोरखाओं के खिलाफ की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणी से आक्रोश

RNS INDIA NEWS 14/01/2026 0
default featured image
  • देहरादून

राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने किया सांसद चैंपियनशिप ट्रॉफी का शुभारंभ

RNS INDIA NEWS 14/01/2026 0

[display_rns_ad]

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • राशिफल 15 जनवरी
  • राज्य गठन के बाद बने फर्जी स्थाई निवास प्रमाण पत्रों की जांच करे सरकार
  • भारतीय गोरखाओं के खिलाफ की जा रही आपत्तिजनक टिप्पणी से आक्रोश
  • लाखों के जेवरात उड़ाने वाला आरोपी पांच घंटे में गिरफ्तार
  • राज्य आंदोलनकारियों को बीस हजार रूपए पेंशन की मांग
  • मकर संक्रांति पर सिमकनी नौले के आसपास चला स्वच्छता अभियान

Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.