
अल्मोड़ा। सरकार भले ही गांवों से पलायन को रोकने के लिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के लाख प्रयत्न क्यों न कर रही हो, लेकिन राज्य के दुर्गम पहाड़ी इलाकों के स्कूलों की दशा सुधरती नजर नहीं आती। राजकीय इण्टर कालेज नैनी चौगर्खा में वर्षों से भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और हिन्दी के प्रवक्ता ही नहीं है। एलटी के सहायक अध्यापकों के भरोसे इन विषयों को पढ़ाया जा रहा है। शिक्षा विभाग की अनदेखी से नाराज अभिभावकों ने जल्द से जल्द प्रवक्ताओं के रिक्त पदों को भरने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि 15 दिन के अंदर यहां प्रवक्ताओं की नियुक्ति नहीं की गई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे। अभिभावकों का कहना है कि जीआईसी नैनी में लगभग एक दर्जन से अधिक गांवों के बच्चे मीलों पैदल चलकर विद्यालय पहुंचते हैं। लेकिन बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां प्रवक्ता ही नहीं हैं। भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और हिन्दी जैसे प्रमुख विषयों के प्रवक्ताओं के पद वर्षो से रिक्त चल रहे हैं। विद्यालय में प्रवक्ता नहीं होने के कारण बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों को काफी दिक्कतें आ रही हैं। मजबूरन अन्य विषयों के शिक्षकों को भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान जैसे कठिन विषय पढ़ाने पड़ते हैं, जिसका बुरा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। विद्यालय प्रबंधन समिति ने छात्र हित में जल्द से जल्द रिक्त पड़े पदों पर प्रवक्ताओं की नियुक्ति की मांग की है और चेतावनी भी दी है कि यदि दो हफ्ते के अंदर यहां प्रवक्ताओं की नियुक्ति नहीं की गई तो अभिभावक और क्षेत्रीय जनता आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे।

