
अल्मोड़ा। मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में रविवार को धर्म जागरण शोभायात्रा एवं सत्संग समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संतों ने मानव सेवा, सामाजिक सद्भाव और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश देते हुए प्राणी मात्र की निस्वार्थ सेवा को भगवान की प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन बताया। हंस ज्ञान आश्रम, धारानौला से निकली धर्म जागरण एवं सामाजिक सद्भाव शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए रामलीला मैदान पहुंची। शोभायात्रा में बच्चों ने शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण, राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान की वेशभूषा धारण कर आकर्षण बटोरा। महिलाओं ने पारंपरिक परिधान में कलश यात्रा निकाली, जबकि ढोल-दमाऊं की थाप पर छोलिया नर्तकों ने शोभायात्रा की शोभा बढ़ाई। रामलीला मैदान में आयोजित संत समागम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता महात्मा सत्यबोधानंद ने कहा कि भगवान की प्राप्ति के लिए आत्मा का निर्मल होना आवश्यक है। आत्मा की शुद्धि, सच्ची श्रद्धा और आस्था से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में माता-पिता को साक्षात भगवान का स्वरूप माना गया है और उनकी सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। मुख्य अतिथि मेयर अजय वर्मा ने कहा कि सनातन धर्म सामाजिक सद्भाव, प्राणी मात्र के कल्याण और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना का संदेश देता है। उन्होंने धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए समाज के सभी वर्गों से आगे आने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि एवं होटल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पूरन सिंह अधिकारी ने भारतीय संस्कृति, संस्कार और धार्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने पर बल दिया। महात्मा करुणा बाई और महात्मा मातंगी बाई ने कार्यक्रम में शामिल सभी श्रद्धालुओं और अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन भुवन चंद्र पांडे ने किया। इस अवसर पर सभासद संजय जोशी, प्रकाश पांडे, लक्ष्मण सिंह, आनंद अधिकारी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।


