Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • राज्य
  • उत्तराखंड
  • टिहरी
  • देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग
  • टिहरी

देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग

RNS INDIA NEWS 02/07/2021
default featured image

नई टिहरी। चारधाम तीर्थपुरोहित एवं हक-हकूकधारी महापंचायत ने देवस्थानम बोर्ड को तत्काल भंग कर पूर्ववत स्थिति बहाल करने को लेकर पीएम, गृह मंत्री , संघ प्रमुख मोहन भागवत व विहिप कार्यकारी अध्यक्ष को पत्र भेजे। पत्र में उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के चारों धामों से तीर्थपुरोहितों व हक हकूकधारियों का गहरा संबंध है, इनसे उन्हें किसी भी तरह अलग नहीं किया जा सकता। महापंचायत अध्यक्ष कृष्ण कांत कोटियाल, सचिव हरीश डिमरी और अन्य पदाधिकारियों की ओर से प्रेषित पत्र में कहा गया है, कि प्रदेश सरकार चारधाम देवस्थानम प्रबन्धकीय विधेयक 2019 को लागू करने से भ्रम की स्थिति बन गयी है। यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ व बदरीनाथ धाम तीर्थपुरोहित समाज एवम हक-हकूकधारी विधेयक को लेकर संशय गहरा गया है। देवस्थानम बोर्ड के जरिये सरकार धामों की संपूर्ण व्यवस्था प्रशासनिक अधिकारियों के हाथों में रखना चाहती है। देवस्थानम अधिनियम व बोर्ड को लेकर चल रहे विवाद के लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है। अधिनियम लाने से पहले सरकार द्वारा धामों से जुड़े तीर्थपुरोहित व हक-हकुकधारी समाज से संवाद नहीं किया गया। इन धामों के रावल, पुजारियों व अन्य लोगों की भी उपेक्षा की गई। महापंचायत के अनुसार चारों धामों व अन्य मंदिरों के सूचीबद्ध अभिलेख स्थानीय समितियों व पंचायतों के पास सुरक्षित हैं। देवस्थानम बोर्ड को किसी भी तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता। करोडों हिंदुओ की आस्था पर आघात करने वाला देव स्थानम विधेयक तीर्थयात्रियों के धार्मिक अधिकारों का भी हनन करने वाला है। तीर्थपुरोहितों और हक-हकूकधारियों ने पीएम और गृहमंत्री से देवस्थानम अधिनियम को तत्काल समाप्त करने की मांग की है।

 

शेयर करें..

Post navigation

Previous: रुद्रप्रयाग के नए कोतवाल बने जयपाल नेगी
Next: परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि बढ़ाने व अनावश्यक फीस के विरोध में छात्रों ने किया प्रदर्शन

Related Post

default featured image
  • टिहरी

भूखंडों का स्वामित्व दर्ज कराने के लिए प्रशासन ने बढ़ाई 15 दिन की समय सीमा

RNS INDIA NEWS 01/02/2026 0
default featured image
  • टिहरी

बिना सहमति मेला आयोजन पर भड़के व्यापारी, बाजार में किया प्रदर्शन

RNS INDIA NEWS 01/02/2026 0
default featured image
  • टिहरी

सीएचसी प्रतापनगर के प्रभारी चिकित्साधिकारी पर अनियमितता का आरोप

RNS INDIA NEWS 29/01/2026 0

Your browser does not support the video tag.

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • राशिफल 02 फरवरी
  • सेवा ही राजनीति का सबसे सशक्त माध्यम : कोश्यारी
  • गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में हुई साल की तीसरी बर्फबारी
  • स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति ने रैली निकाली और प्रदर्शन किया
  • सकल हिंदू एकता मंच की ओर से विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित
  • भूखंडों का स्वामित्व दर्ज कराने के लिए प्रशासन ने बढ़ाई 15 दिन की समय सीमा

Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.