
नई दिल्ली(आरएनएस)। ईरान ने 13 अप्रैल को इजरायल पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं और ड्रोन से भी हमला किया। इजरायल ने इन हमलों को हवा में ही रोककर अपने बहुस्तरीय वायु रक्षा नेटवर्क की मजबूती साबित कर दी। इस घटनाक्रम ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत मौजूदा हवाई खतरों से खुद को बचाने के लिए कितना तैयार है। जानकारों का कहना है कि भारत भी हवा में मिसाइल और ड्रोन को नष्ट करने में सक्षम है। भारत के पास आकाश और समर जैसे आधुनिक एयर डिफेंस वेपन हैं, जो हवाई हमलों को रोकने में कारगर हैं।
तनाव की ताजा स्थिति में शुक्रवार को इजरायल ने ईरानी हमले के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने अपेक्षित जवाबी हमले से खुद को बचाने के लिए अपनी वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी है। भारत के पास भी वायु रक्षा प्रणालियां हैं, जिनमें लंबी दूरी की मिसाइलों को रोकने के लिए बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) और एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियां शामिल हैं। इसके अलावा भारत ने मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल जैसे स्वदेशी हथियार भी विकसित किए हैं। भारतीय अधिकारियों ने शुक्रवार को इजरायल के साथ विकसित की गईं आकाश और समर प्रणालियों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों के पास हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम विभिन्न प्रणालियां हैं, जिससे दुश्मन की मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टर और मानव रहित विमानों को आसमान में ही नष्ट किया जा सकता है
भारत के पास ये प्रणालियां भी
भारतीय शस्त्रागार में अन्य वायु रक्षा प्रणालियों में इजरायली स्पाइ-डर के अलावा सोवियत मूल की पेचोरा, ओएसए-एके, तुंगुस्का, स्ट्रेला और शिल्का शामिल हैं। इनके अलावा, जू-23-2बी एंटी-एयरक्राफ्ट बंदूकें, उन्नत एल-70 एंटी-एयरक्राफ्ट भी शामिल हैं। अधिकारियों ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, भारत के पास स्वीडिश हथियार फर्म बोफोर्स एबी द्वारा निर्मित एयर क्राफ्ट गन और और इग्ला मैनपैड्स (मैन-पोर्टेबल वायु रक्षा प्रणाली) भी हैं।
रूस से हासिल किया एस-400
एस-400 भारत द्वारा हासिल की जाने वाली नवीनतम मिसाइल प्रणाली है। भारत ने अक्तूबर 2018 में रूस से ₹39 हजार करोड़ रुपये में पांच एस-400 मिसाइल सिस्टम का ऑर्डर दिया था। एस-400 रडार और मिसाइलों के साथ आता है, जो इसे अधिकतम सीमा के साथ विभिन्न ऊंचाई और रेंज बैंड पर खतरों को खत्म करने की अनुमति देता है
स्वदेशी हथियार भी कर रहा विकसित
भारत ने 400 किलोमीटर की वायुमंडलीय सीमा के भीतर और बाहर आने वाली शत्रु मिसाइलों को नष्ट करने के लिए एंडो एटमॉस्फेरिक और एक्सो-एटमॉस फेरिक इंटरसेप्ट सिस्टम विकसित करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ बहुस्तरीय सुरक्षा के लिए दोनों प्रणालियों को एकीकृत किया गया है। नवंबर 2022 में, डीआरडीओ ने पहली बार एडी-1 नामक लंबी दूरी की इंटरसेप्टर मिसाइल का पूर्ण परीक्षण किया। डीआरडीओ लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली स्वदेशी मिसाइल प्रणाली विकसित कर रहा है। इसकी अधिकतम सीमा 350 किमी होगी और लगभग पांच वर्षों में तैनात होने की उम्मीद है।

