
देहरादून (आरएनएस)। उत्तराखंड में दिसंबर माह पूरी तरह सूखा बीत गया। पहाड़ी क्षेत्रों में जहां बर्फबारी नहीं हो सकी, वहीं मैदानी इलाकों में घना कोहरा और सूखी ठंड ने जनजीवन को प्रभावित किया। बारिश न होने का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव स्वास्थ्य, पर्यावरण, खेती और बागवानी पर भी साफ नजर आया। इससे पहले नवंबर माह में भी प्रदेश में सामान्य से करीब 98 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी।
सूखी ठंड और नमी की कमी के चलते प्रदूषण का स्तर भी लगातार बढ़ा। बुधवार, 31 दिसंबर को राजधानी देहरादून में करीब 12 घंटे तक वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के पार रहा। वरिष्ठ फिजिशियन कुमार जी कौल के अनुसार बारिश न होने से हवा में मौजूद प्रदूषण के कण नीचे बैठ गए, जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। अस्पतालों में खांसी, जुकाम, एलर्जी और सांस के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। बुजुर्गों और बच्चों में निमोनिया और कोल्ड डायरिया जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दिसंबर में सामान्य तौर पर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहते हैं, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होती है। इस बार पश्चिमी विक्षोभ न केवल कम आए, बल्कि वे कमजोर भी रहे। इसी कारण पूरे महीने प्रदेश में बारिश और बर्फबारी नहीं हो सकी।
बारिश की कमी का सबसे बड़ा असर खेती और बागवानी पर पड़ा है। रबी की फसलों की बुआई प्रभावित हुई है और गेहूं, सरसों व दालों की फसलों को पर्याप्त नमी नहीं मिल सकी। किसानों को अतिरिक्त सिंचाई का सहारा लेना पड़ा। वहीं सेब और अन्य फलों के लिए आवश्यक चिलिंग आवर्स पूरे न होने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो दिसंबर 2025 में प्रदेश में शून्य मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इससे पहले वर्ष 2024 में दिसंबर माह में 23.6 मिलीमीटर, 2023 में 0.2 मिलीमीटर, 2021 में 2.5 मिलीमीटर, 2020 में 14 मिलीमीटर और 2019 में 28.6 मिलीमीटर बारिश हुई थी। यह आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि इस बार दिसंबर में बारिश का अभाव असामान्य रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार दिसंबर में सामान्य बारिश 17.5 मिमी होती है, लेकिन इस बार एक मिमी भी दर्ज नहीं हुई। देहरादून में सामान्यतः 21 मिमी बारिश होती है, जो पूरी तरह नदारद रही।
मौसम विभाग के अनुसार यदि आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है तो प्रदेश को बारिश और बर्फबारी से कुछ राहत मिल सकती है। फिलहाल सूखे मौसम ने उत्तराखंड के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

