
अल्मोड़ा। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पोक्सो एक्ट के तहत दिए गए एक फैसले पर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने कड़ा एतराज जताया है। समिति ने इस निर्णय को महिला गरिमा पर आघात और बलात्कारियों के हौसले बढ़ाने वाला बताया है, जिससे महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा पर नकारात्मक असर पड़ेगा। मामला कासगंज का है, जहां तीन आरोपियों ने एक नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार की कोशिश की थी। राहगीरों के हस्तक्षेप के बाद आरोपी मौके से भाग गए थे। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि आरोपियों ने उसके निजी अंगों को छुआ और उसे निर्वस्त्र करने की कोशिश की। ट्रायल कोर्ट ने इस घटना को बलात्कार मानते हुए आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे पलटते हुए केवल छेड़छाड़ का मामला करार दिया, जिसे समिति ने असंवैधानिक और आपत्तिजनक बताया है। निर्भया कांड के बाद गठित जस्टिस जे एस वर्मा कमेटी ने बलात्कार की व्यापक परिभाषा तय की थी, जिसमें पीड़िता के बयान को ही पर्याप्त साक्ष्य माना गया था। सुप्रीम कोर्ट भी अपने एक फैसले में कह चुका है कि नाबालिग बच्ची के निजी अंगों को गलत नीयत से छूना बलात्कार के दायरे में आता है। इससे पहले, बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि इस तरह की घटनाओं को बलात्कार की श्रेणी में ही रखा जाना चाहिए। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के इस फैसले पर महिलाओं में आक्रोश है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले का स्वत: संज्ञान लेने और ट्रायल कोर्ट के फैसले के अनुसार आरोपियों को सजा देने की मांग की है।

