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राज्य स्तरीय शिक्षक अवार्ड के लिए चार वर्षों के रिजल्ट का हो आंकलन

RNS INDIA NEWS 20/08/2021
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आरएनएस ब्यूरो
सोलन। हिमाचल प्रदेश का शिक्षा विभाग इन दिनों उन पात्र शिक्षकों के चयन में जुटा है,जो शिक्षा के क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से उत्कृष्ट कार्य करते आ रहे हैं। शिक्षकों को राष्ट्र और राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार को हासिल करने के लिए कई तरह की जटिल प्रक्रियाओं से होकर गुजरना पड़ता है। सभी मापदंडों पर खरा उतरने के बाद ही चयन कमेटी द्वारा किसी पात्र शिक्षकों को शिक्षक अवार्ड के लिए चयनित किया जाता है। परंतु इस बार कई पात्र शिक्षक इस गौरव से वंचित हो सकते हैं।
कोविड महामारी से उपजी गंभीर परिस्थितियों का विपरीत असर इस बार शिक्षक अवार्ड के लिए चयनित होने वाले शिक्षकों पर भी पड़ सकता है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इस अवार्ड के लिए हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा जो मापदंड तय किए गए हैं उन्हें इस बार परिपूर्ण करना बहुत से शिक्षकों के लिए संभव नहीं है। हमारे प्रतिनिधि ने जब इस संदर्भ में गहराई से छानबीन करते हुए शिक्षकों से परिचर्चा की तो कई बातें सामने आई है।
जानकारी के मुताबिक पात्र शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए राज्य स्तरीय व राष्ट्रीय स्तरीय अवार्ड से सम्मानित किया जाता है। राज्य स्तरीय अवार्ड के लिए उनके पांच वर्षों के परीक्षा परिणामों को भी अधिक महत्व दिया जाता है। इस संदर्भ में शैक्षणिक दक्षता तथा गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के तहत केवल बोर्ड कक्षाओं के अध्यापक जो 10वीं और 12वीं को पढ़ाते हैं उनके पांच वर्षों के बोर्ड परिणाम के अलग से मार्कस होते हैं।
इसी तरह पांच वर्षों के रिजल्ट की डिस्टकिसन के अलग से मार्कस होते हैं,लेकिन पिछला शैक्षणिक सत्र 2020-2021 कोरोना महामारी के चलते बिना किसी बोर्ड परीक्षाओं के ही बच्चों को मजबूरन विभाग को पास करना पड़ा है,ताकि विद्यार्थियों की अगली कक्षाओं में दाखिला हो सके और पढ़ाई का नुकसान न हो।
प्रदेश शिक्षा विभाग के विभिन्न क्षेत्रों के अध्यापकों से जब बातचीत की तो उनका कहना है कि बोर्ड कक्षाओं के अध्यापक जो 10वीं और 12वीं को पढ़ाते हैं उनके इस वर्ष के रिजल्ट को उनके खाते में न डाला जाए। क्योंकि 2020-2021 के रिजल्ट को बनाने में पिछली कक्षाओं से भी बच्चों का आकलन किया गया है। सरकार और प्रदेश शिक्षा विभाग से शिक्षकों की मांग है कि राज्य स्तरीय अवार्ड के लिए पांच वर्षों की बजाए चार वर्षों के रिजल्ट से ही अध्यापकों का आंकलन किया जाए,ताकि पात्र अध्यापकों का चयन राज्य स्तरीय अवार्ड के लिए हो सके।

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