Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • राज्य
  • उत्तराखंड
  • अल्मोड़ा
  • प्रायोगिक शोध की प्रक्रिया एवं प्रविधि से रूबरू हुए प्रतिभागी
  • अल्मोड़ा

प्रायोगिक शोध की प्रक्रिया एवं प्रविधि से रूबरू हुए प्रतिभागी

RNS INDIA NEWS 16/03/2021
IMG-20210316-WA0006.jpg

सात दिवसीय ओरिएंटेशन कोर्स के दूसरे दिन भी जारी

शोध प्रविधि एवं उपागम के बारे में कराया अवगत

अल्मोड़ा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) व इंस्टीट्यूट आॅफ एडवांस स्टेडीज इन एजुकेशन अल्मोड़ा के तत्वावधान में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय में आयोजित सात दिवसीय आॅनलाईन ओरिएंटेशन कोर्स के दूसरे दिन प्रतिभागियों को शोध प्रविधि एवं शोध चरणों के बारे में बारे में मास्टर ट्रेनरों के द्वारा विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई। वहीं, तीसरे और चैथे सत्र में वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो एनसी ढ़ौडियाल के द्वारा प्रायोगिक शोध की विविध पहलुओं के बारे में जानकारी दी गई।
दूसरे दिन की शुरूआत करते हुए लखनऊ विवि की डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन की डॉ किरण लता डंगवाल ने शोध के प्रकार, प्रविधि एवं महत्व के बारे में उदाहरणों के माध्यम से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जब कोई दो वस्तुएं, पदार्थ आपस में एक दूसरे से वैरी करतीं हैं, तो वैरी करने के कारण असल समस्या उत्पन्न होती है। उन्होंने शोध प्रविधि को प्रतिभागियों के साथ अंतः क्रिया के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से सरल एवं बोधगम्य भाषा में समझाया। डॉ किरण लता डंगवाल ने बताया कि शोध करते समय हमें विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए, ताकि, शोध परिणाम का सामान्यीकरण गुणवत्ता पूर्ण ढंग से किया जा सके। वहीं, तीसरे एवं चैथे सत्र में प्रो एनसी ढ़़ौडियाल ने प्रायोगिक शोध को प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रायोगिक शोध वर्तमान समय में सर्वाधिक शक्तिशाली विधि है। इसको करने के लिए विशेष सावधानियां बरतनी पड़ती है। इस दौरान उन्होंने प्रायोगिक शोध को प्रभावित करने वाले गुणात्मक चर, मध्यस्थ चर, स्वतंत्र-परतंत्र चर, बाह्य चर आदि चरों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। तीसरे सत्र में प्योर एक्सपेरिमेंटल रिसर्च, क्वासी एक्सपरिमेंटल रिसर्च सोलमन माॅडल के बारे में जानकारी दी। पहले दो सत्रों का संचालन डाॅ संगीता पंवार और तीसरे और चैथे सत्र का संचालन डाॅ नीलम कुमारी ने किया। इस अवसर पर अंकिता साह, हिमांशु शर्मा, गोविंद सुयाल, श्रृंखला चावला आदि ने सहयोग दिया।

शेयर करें..

Post navigation

Previous: नागा साधु का फक्कड़ के साथ मारपीट का वीडियो वायरल
Next: मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने मंत्रियों को बाँटे विभाग

Related Post

rns featured image new
  • अल्मोड़ा

नीट री-एग्जाम शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न, पुलिस रही मुस्तैद

RNS INDIA NEWS 21/06/2026 0
rns featured image new
  • अल्मोड़ा

केतन हत्याकांड के विरोध में गांधी पार्क में धरना, दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग

RNS INDIA NEWS 21/06/2026 0
alm 01_11zon
  • अल्मोड़ा
  • उत्तराखंड

उत्तराखंड के धामों के संरक्षण एवं विकास के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध: धामी

RNS INDIA NEWS 21/06/2026 0

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • राशिफल 22 जून
  • सड़क डामरीकरण के लिए निविदा जारी होने के बाद भी काम शुरू नहीं
  • शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच देकर 1.17 लाख की ठगी
  • हाईटेंशन बिजली लाइन का ग्रामीणों ने किया विरोध
  • कर्णप्रयाग की घटना पर सिख समाज में रोष
  • नीट री-एग्जाम शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न, पुलिस रही मुस्तैद
Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.