

अल्मोड़ा। गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने जा रहे उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के कार्यकर्ताओं पर वाटर कैनन के इस्तेमाल और पुलिस कार्रवाई के विरोध में बुधवार को अल्मोड़ा स्थित दल के जिला कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। दल के संरक्षक काशी सिंह ऐरी ने कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता को अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने और सरकार के समक्ष अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। काशी सिंह ऐरी ने कहा कि आंदोलनकारियों पर वाटर कैनन का प्रयोग करना और जनता की आवाज दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों तथा संवैधानिक अधिकारों को लेकर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित करने, स्थानीय युवाओं को रोजगार देने, मूल निवास लागू करने और सशक्त भू-कानून बनाने जैसी मांगों को लेकर ज्ञापन देने जा रहा था। ये मुद्दे राज्य की पहचान, युवाओं के भविष्य और मूल निवासियों के अधिकारों से जुड़े हैं। ऐरी ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के साथ सड़क अवरुद्ध किए जाने से आम नागरिकों और मरीजों को हुई परेशानी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब आम जनता अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरती है तो प्रशासन कार्रवाई करता है, लेकिन जब प्रशासन की ओर से सड़क अवरुद्ध होने से लोगों को परेशानी होती है तो इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा। काशी सिंह ऐरी ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में मूल निवास की व्यवस्था के स्थान पर स्थायी निवास प्रमाण पत्र की व्यवस्था शुरू किए जाने से राज्य के मूल निवासियों के हित प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नौकरियों में बाहरी लोगों को अवसर दिए जा रहे हैं, जबकि राज्य के मूल निवासी बेरोजगार हैं। ऐरी ने कहा कि जनता राष्ट्रीय दलों की राजनीति से परेशान हो चुकी है और सरकार बदलने के मूड में है। उनके अनुसार, राज्य स्थापना आंदोलन में योगदान देने वाली यूकेडी के पक्ष में जनता का समर्थन बढ़ रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिलाध्यक्ष दिनेश जोशी, केंद्रीय मंत्री त्रिलोक लटवाल, केंद्रीय मंत्री गिरीश नाथ गोस्वामी, जिला महामंत्री प्रताप सिंह, जिला महामंत्री देवेश जोशी, महानगर अध्यक्ष मोहित साह, महानगर अध्यक्ष युवा वंश कनवाल, विनय किरोला, दीवान बनोला, गणेश सिंह और सुजीत टम्टा सहित कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।



