


रुद्रप्रयाग। पंचकेदारों में शामिल द्वितीय केदार मद्महेश्वर और तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने की तिथियां घोषित कर दी गई हैं। विजयदशमी के अवसर पर निर्धारित परंपराओं और पंचांग गणना के अनुसार दोनों धामों के कपाट बंद होने का कार्यक्रम तय किया गया।
मद्महेश्वर धाम के कपाट 16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। मंगलवार को ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कपाट बंद होने की तिथि निर्धारित की गई। कपाट बंद होने के बाद भगवान मद्महेश्वर की चल विग्रह डोली शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना होगी। पहले दिन डोली गौंडार गांव में रात्रि विश्राम करेगी। 17 नवंबर को डोली गौंडार से रांसी पहुंचेगी, जबकि 18 नवंबर को रांसी से गिरिया के लिए प्रस्थान करेगी। 19 नवंबर को डोली गिरिया से चलकर ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी। यहां शीतकाल के दौरान भगवान मद्महेश्वर की पूजा-अर्चना की जाएगी।
वहीं, तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट 6 नवंबर को बंद किए जाएंगे। विजयदशमी पर मक्कूमठ स्थित मर्कटेश्वर मंदिर में पंचांग गणना के बाद कपाट बंद होने की तिथि घोषित की गई। कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली रात्रि विश्राम के लिए चोपता पहुंचेगी। 7 नवंबर को डोली भनकुन पहुंचेगी और 8 नवंबर को अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मर्कटेश्वर मंदिर, मक्कूमठ में विराजमान होगी। इसके बाद शीतकाल में भगवान तुंगनाथ की पूजा-अर्चना यहीं संपन्न होगी।
मद्महेश्वर धाम पंचकेदारों में द्वितीय और तुंगनाथ धाम तृतीय केदार के रूप में प्रसिद्ध हैं। यात्रा काल में दोनों धामों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सर्दियों में भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के चलते परंपरा के अनुसार कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद दोनों धामों के देव विग्रहों की पूजा निर्धारित शीतकालीन गद्दीस्थलों पर की जाती है।





