


देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लोकभवन कूच करने पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। कैंट कोतवाली पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत समेत 30 नामजद लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। इसके अलावा 10 से 15 अज्ञात कार्यकर्ताओं को भी आरोपी बनाया गया है।
कांग्रेस ने गुरुवार को प्रदेश कार्यालय से घंटाघर तक कैंडल मार्च निकालने का ऐलान किया था। इसी क्रम में दोपहर करीब 1:35 बजे गणेश गोदियाल और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत के नेतृत्व में कार्यकर्ता एनेक्सी बैरियर पहुंचे। यहां अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर नारेबाजी की गई।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन कुछ कार्यकर्ता हाथीबड़कला बैरियर पार कर लोकभवन की ओर बढ़ गए। पुलिस ने आरोप लगाया कि हरीश रावत, प्रीतम सिंह समेत अन्य नेताओं ने निर्देशों की अनदेखी की और प्रदर्शनकारियों ने बलपूर्वक बैरिकेडिंग पार करते हुए पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की। पुलिस का यह भी आरोप है कि प्रदर्शनकारी लोकभवन के मुख्य द्वार तक पहुंचे और उसे जबरन खोलने का प्रयास किया।
कैंट कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक संतोष सिंह कुंवर की ओर से भारतीय न्याय संहिता की धारा 132 और 223 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। मामले की जांच शहर कोतवाल कैलाश चंद्र भट्ट को सौंपी गई है। पुलिस नामजद आरोपियों के साथ अज्ञात प्रदर्शनकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। कांग्रेस अंकिता भंडारी प्रकरण में कथित वीआईपी की भूमिका और उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार सरकार पर दबाव बना रही है।




