

हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया धीमी होने से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 22 सितंबर को 10 विशेषज्ञ डॉक्टरों के साक्षात्कार होने के बावजूद अब तक चयनित डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए हैं। इससे विशेषज्ञ डॉक्टरों के दूसरे संस्थानों का रुख करने की आशंका बनी हुई है।
22 सितंबर को राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के प्राचार्य समेत उच्चस्तरीय पैनल ने न्यूरो, हड्डी, स्त्री रोग और बाल रोग सहित विभिन्न विभागों के 10 विशेषज्ञ डॉक्टरों के साक्षात्कार लिए थे। उस समय चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने साक्षात्कार के एक सप्ताह के भीतर चयनित डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र जारी करने की बात कही थी, लेकिन दो सप्ताह बीतने के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
समय पर नियुक्ति पत्र नहीं मिलने का असर विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता पर पड़ सकता है। पूर्व में भी साक्षात्कार के एक से दो माह बाद नियुक्ति पत्र जारी होने के कारण कई चयनित डॉक्टर दूसरे निजी या सरकारी संस्थानों में नौकरी ज्वाइन कर चुके हैं। इसी वजह से साक्षात्कार के तुरंत बाद नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग उठती रही है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी पहले से ही 50 प्रतिशत से अधिक फैकल्टी की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति में देरी से चिकित्सा सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। पूर्व में पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेजों को भी फैकल्टी की कमी के चलते राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से मान्यता संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति में देरी के बीच चिकित्सा शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। समय रहते नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो विशेषज्ञ डॉक्टरों के दूसरे संस्थानों में जाने का खतरा बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।



