
अल्मोड़ा। उत्तराखंड क्रांति दल में संगठनात्मक कार्यप्रणाली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर असहमति के बीच 15 पदाधिकारियों ने अपने पदों से और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की। बुधवार को नगर के एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में पदाधिकारियों ने अपने निर्णय की जानकारी दी। पदाधिकारियों ने कहा कि उनका निर्णय किसी व्यक्तिगत विवाद के कारण नहीं, बल्कि संगठनात्मक कार्यप्रणाली, अनुशासन, स्पष्ट नियम और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर उत्पन्न असहमति के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि संगठन में पदाधिकारियों के अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट होनी चाहिए तथा निर्णय व्यक्ति विशेष, दबाव या रिश्तों के आधार पर नहीं, बल्कि संगठन के नियम और संविधान के अनुसार होने चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत अभियान चलाना नहीं है। व्यक्ति से ऊपर संगठन और रिश्तों से ऊपर नियम एवं संविधान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। नरेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि संगठन के भीतर रहते हुए अपनी बात रखने और समाधान निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन जब उन्हें लगा कि उनके सवालों पर अपेक्षित स्पष्टता नहीं बन पा रही है तो उन्होंने टकराव के बजाय अलग रास्ता चुनने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य संघर्ष को बढ़ाना नहीं, बल्कि अपने विचारों और उत्तराखंड के मुद्दों के लिए नया रास्ता चुनना है। पत्रकार वार्ता में कहा गया कि आगे की राजनीतिक दिशा को लेकर कार्यकर्ताओं से संवाद जारी रहेगा। जल-जंगल-जमीन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन और पहाड़ के अधिकार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात भी कही गई। कार्यक्रम में हिमांशु बिष्ट, गोपाल सिंह बिष्ट, मुकेश सिंह बिष्ट, सोनू नेगी, पूरन सिंह बिष्ट, निर्मल रजवार, सागर कठायत, योगेश पांडे, मोहित कठायत, शेखर कुमार, सचिन राणा, हेमू कनवाल, ललित सिंह, दिव्या, नीतू, प्रियंका, राहुल बिष्ट, शंकर मेहरा और खड़क राणा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं समर्थक मौजूद रहे।
