
देहरादून (आरएनएस)। उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग में लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच शासन ने आयोग के सचिव भगवती प्रसाद त्रिवेदी को पद से हटा दिया है। उनकी जगह उप निदेशक बरकत अली को सचिव का चार्ज सौंपा गया है। बरकत अली ने शनिवार को आयोग में कार्यभार ग्रहण कर लिया। सचिव बदलने के बाद आयोग में महीनों से लंबित शिकायतों की सुनवाई शुरू होने की उम्मीद जगी है।
भगवती प्रसाद त्रिवेदी की नियुक्ति को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे थे। आयोग में जेएस रावत की प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद विभाग में एडीओ पद पर तैनात बीपी त्रिवेदी को सचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। नियुक्ति प्रक्रिया और नियमों को लेकर मोबीन अहमद ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की थी, जिस पर 12 अक्टूबर को सुनवाई प्रस्तावित है।
इसी बीच शासन स्तर पर त्रिवेदी को सचिव पद से हटाने का निर्णय लिया गया। विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते की ओर से इस संबंध में कार्रवाई की गई। आयोग के भीतर भी सचिव के अधिकारों को लेकर असंतोष और विवाद की स्थिति बनी हुई थी। उपाध्यक्ष फरजाना बेगम समेत कई सदस्यों की बैठक में सचिव के अधिकारों को लेकर सवाल उठे थे। सचिव के कुछ अधिकार वापस लिए जाने और मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी को निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई थी।
विभागीय कर्मचारी रहे मृतक मोहसिन के परिजनों की ओर से भी त्रिवेदी के खिलाफ कई आरोप लगाए गए थे। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा।
सचिव विवाद का असर आयोग के कामकाज पर भी पड़ा है। आयोग में अप्रैल के बाद से शिकायतों की सुनवाई नहीं हो सकी है और वर्तमान में 150 से अधिक शिकायतें लंबित बताई जा रही हैं। शिकायतों की सुनवाई नहीं होने से फरियादियों को लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है। नए सचिव बरकत अली के कार्यभार संभालने के बाद उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने जल्द सुनवाई की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं।
इस बीच मदरसों के साथ मकतबों यानी ट्यूशन प्वाइंट पर हुई कार्रवाई का मामला भी आयोग के सामने है। मकतबों को कार्रवाई से बाहर रखने की मांग को लेकर जमीयत के प्रतिनिधिमंडल ने शासन से मुलाकात की है। विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार प्रतिनिधिमंडल ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि मकतब संबंधित एक्ट के दायरे से बाहर हैं। शासन की ओर से न्यायालय के आदेश का अध्ययन किया जा रहा है और इसके बाद एक-दो दिन में इस संबंध में आदेश जारी किए जाने की संभावना है।
नए सचिव की नियुक्ति के बाद अब आयोग के सामने लंबित शिकायतों की सुनवाई शुरू करने और नियमित सुनवाई व्यवस्था को बहाल करने की चुनौती है। साथ ही पांच महीने से लंबित मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया भी नए प्रशासनिक नेतृत्व की प्राथमिकता रहेगी।
