
अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री सतत आजीविका योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अल्मोड़ा के जसकोट में सात दिवसीय मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। प्रशिक्षण में ग्राम उज्यौला, फफना और पोखरी की 25 महिला लाभार्थियों को मधुमक्खी पालन के व्यावहारिक और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। ग्रामीण समाज कल्याण समिति (ग्रास) तल्ला चीनाखान द्वारा उत्तराखंड महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण का समापन सोमवार को हुआ। अधिशासी निदेशक ग्रास भूपेन्द्र चौहान ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है। प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर पूरन सिंह कनवाल और हिमांशु पंत ने प्रतिदिन चार घंटे सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रयोगात्मक सत्र फफना निवासी मौनपालक शंकर सिंह मनराल के मौन पालन केंद्र पर आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को मधुमक्खी पालन से जुड़े कार्यों का शैक्षिक भ्रमण भी कराया गया, जिससे उन्हें व्यवसाय की व्यवहारिक समझ मिल सके। प्रशिक्षकों ने बताया कि मधुमक्खी पालन कम लागत वाला लाभकारी व्यवसाय है, जिसे किसान, भूमिहीन बेरोजगार, महिला और युवा सभी आसानी से अपना सकते हैं। इससे शहद उत्पादन के साथ-साथ फसलों के परागण में वृद्धि होती है, जिससे कृषि उत्पादन भी बढ़ता है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को मधुमक्खियों की देखभाल, मौसम के अनुसार प्रबंधन, मौन बॉक्स संचालन और शहद उत्पादन की आधुनिक तकनीकों की भी जानकारी दी गई। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में पात्र लाभार्थियों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। समापन कार्यक्रम में संस्थाध्यक्ष गोपाल सिंह चौहान, ग्राम प्रधान नेहा बिष्ट, क्षेत्र पंचायत सदस्य ज्योति बिष्ट, सरिता किरौला, शिवराज सिंह, जीवन सिंह बिष्ट, प्रेम सिंह मनराल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं सभी महिला लाभार्थी उपस्थित रहे।

