
नई दिल्ली। नेपाल में तिब्बत से आने वाली भोटे कोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने व्यापक तबाही मचा दी है। अब तक 98 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 105 भारतीय पर्यटकों समेत सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ से पुल, सड़कें, बाजार और कई जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। हालात को देखते हुए भारत ने नेपाल को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है, वहीं बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी अलर्ट जारी किया गया है।
बुधवार सुबह रासुवा जिले के रसुवागढ़ी-टिमुरे क्षेत्र में भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे रासुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में भारी तबाही हुई। सीमा शुल्क परिसर में खड़े वाहन और सामान बह गए, कई पुल क्षतिग्रस्त हो गए और चीन से जुड़े रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र का आधारभूत ढांचा भी प्रभावित हुआ।
नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक सूची के अनुसार 384 यात्री लापता हैं। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय पर्यटक और 37 एनआरआई भी हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रारंभिक आंकड़ा है और सत्यापन के बाद इसमें बदलाव संभव है।
बाढ़ का असर नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ा है। आठ संचालित जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिनकी कुल क्षमता 354 मेगावाट है। इसके अलावा रासुवा और नुवाकोट में निर्माणाधीन पांच परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है, जिनमें रसुवागढ़ी, संजेन खोला और अपर त्रिशूली-3ए जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।
नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस राहत एवं बचाव अभियान में जुटे हैं। हेलीकॉप्टर, ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद से लापता लोगों की तलाश की जा रही है। कई स्थानों से लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि त्रिशूली क्षेत्र में आपात चिकित्सा सेवाएं भी शुरू कर दी गई हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत कर बाढ़ में हुई जनहानि पर शोक व्यक्त किया और भारत की ओर से हरसंभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया। भारत ने दवाइयों, राशन और अन्य राहत सामग्री की खेप नेपाल भेजनी शुरू कर दी है। आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों को भी नेपाल भेजने की तैयारी की जा रही है।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने बताया कि बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
नेपाल में आई बाढ़ के प्रभाव को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ा दी गई है। आशंका है कि त्रिशूली नदी का बढ़ा जलस्तर आगे चलकर गंडक नदी को प्रभावित कर सकता है। इसे देखते हुए संबंधित जिलों को सतर्क रहने और आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास नेपाल सरकार के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय के अनुसार प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए दूतावास ने आपात हेल्पलाइन भी जारी की है और राहत एवं बचाव कार्यों पर लगातार नजर रखी जा रही है।


