
अल्मोड़ा। कुमाऊं की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक सातों-आठों पर्व बुधवार को बिरूड़ पंचमी के साथ आरंभ हो गया। पर्व की शुरुआत पर नगर के दुगालखोला मोहल्ले में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार गौरा, महेश्वर और गणेश की प्रतिमाओं का निर्माण कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। चन्द्रमणि भट्ट के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने लोक परंपरा के अनुरूप कचकूड़ी-माकुड़ी के विशेष तनों से देवी-देवताओं की प्रतिमाएं तैयार कीं। पारंपरिक गीतों और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धा और उत्साह के साथ पर्व की शुरुआत हुई। कुमाऊं में सातों-आठों पर्व को पारिवारिक सुख-समृद्धि, वैवाहिक मंगल और लोक आस्था का प्रमुख उत्सव माना जाता है। बिरूड़ पंचमी से आरंभ होने वाले इस पर्व में गौरा-महेश्वर की पूजा के माध्यम से परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना की जाती है। यह पर्व क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का भी माध्यम है। आयोजन में मौजूद लोगों ने कहा कि बदलते दौर में ऐसी पारंपरिक लोक विधाओं का संरक्षण आवश्यक है, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत और रीति-रिवाजों से जुड़ी रहे। इस अवसर पर तारा भट्ट, कमला भट्ट, गीता पोखरिया, हेमा पाण्डेय, भगवती गुर्रानी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

