
अल्मोड़ा। प्रेमचंद जयंती के अवसर पर अल्मोड़ा यूथ क्लब की ओर से ‘प्रेमचंद व हमारा जीवन’ विषय पर ओपन माइक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में करीब 40 युवाओं ने प्रतिभाग करते हुए प्रेमचंद के साहित्य को वर्तमान सामाजिक परिप्रेक्ष्य से जोड़कर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रेमचंद को याद करना नहीं, बल्कि उनके साहित्य को आज के सामाजिक संदर्भों में समझना, उस पर विचार-विमर्श करना और युवाओं के बीच संवाद की संस्कृति को विकसित करना था। प्रतिभागियों ने प्रेमचंद की विभिन्न कहानियों का अध्ययन कर उनके पात्रों, घटनाओं और सामाजिक संदेशों को वर्तमान परिस्थितियों से जोड़ते हुए अपनी स्वतंत्र सोच प्रस्तुत की। चर्चा के दौरान जाति, वर्ग, गरीबी, शिक्षा, सामाजिक असमानता, महिलाओं की स्थिति, श्रम, मानवीय संवेदनाएं और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर गंभीर संवाद हुआ। युवाओं ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियों में उठाए गए कई प्रश्न आज भी समाज के सामने मौजूद हैं और उनके समाधान के लिए संवेदनशील नागरिकों की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। इस अवसर पर सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के दो प्राध्यापकों सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और साहित्यप्रेमियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने युवाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी मानवीय मूल्यों और सामाजिक चेतना को मजबूत करने में अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने युवाओं से नियमित अध्ययन, विचार-विमर्श और सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने वर्षभर साहित्य, समाज और समकालीन मुद्दों पर नियमित संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। संचालन किरण ने किया। इस दौरान डॉ. पूरन, डॉ. आस्था, जगदीश भंडारी, संदीप सिंह नयाल, शिव, सतीश, अभिषेक, विकास, सुरेंद्र, हरीश और धीरज सहित अन्य प्रतिभागियों ने अपने विचार व्यक्त किए।


