
विकासनगर(आरएनएस)। छत्रधारी चालदा महाराज के दसऊ मंदिर में सोमवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान कुछ श्रद्धालुओं के चेहरे पर खुशी के भाव दिखाई दे रहे थे तो कुछ श्रद्धालुओं की आंखों से अश्रुधारा उमड़ रही थी। मौका था ढाई साल के दसऊ प्रवास के समापन का। दोपहर डेढ़ बजे देव पालकी मंदिर के गर्भ गृह से बाहर निकली। जिसके बाद लोगों ने देव दर्शन किए। शाम चार बजे खत पशगांव के ग्रामीण मंदिर परिसर में आरती करने पहुंचे। सभी ग्रामीणों को पता था कि यह अंतिम अवसर है महाराज की अपने गांव के मंदिर में आरती करने का, जिससे ग्रामीणों की आंखें नम थी। वहीं दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश के गवाली पश्मी गांव से देवता को लेने आए श्रद्धालुओं में खुशी का माहौल था। ‘कांसे की कंस्तूरी गूगेला भरो धूपा, केती तेरे वेशा राजा केती तेरे रूपा…. के साथ दसऊ गांव समेत पूरे खत पशगांव में रातभर भावुकता के बीच चालदा महाराज के जयकारे गूंजते रहे। ढाई साल पूर्व खत समाल्टा से 29 अप्रैल 2023 को छत्रधारी चालदा महाराज दसऊ प्रवास के लिए निकले थे, जो एक मई देर रात दसऊ मंदिर के गर्भगृह में विराजमान हुए। 10 दिसंबर को देवता का दसऊ गांव से प्रस्थान होगा। सोमवार को देवता की खुले आसमान के नीचे बागड़ी हुई, जबकि मंगलवार का बागड़ी पूजन दसऊ गांव के ही एक ग्रामीण के घर में होगा। देवता को लेने के लिए रविवार को छह सौ श्रद्धालु हिमाचल प्रदेश के गवाली पश्मी गांव से पहुंचे। श्रद्धालुओं का ग्रामीणों ने पारंपरिक और धार्मिक रीति रिवाजों के तहत भव्य स्वागत किया। जिसके बाद देव प्रांगण में रात्रि जागरण हुआ, जिसमें पारंपरिक हारुल नृत्य के माध्यम से देव आराधना की गई।

