
अल्मोड़ा। प्रदेशभर में ‘चार साल बेमिसाल’ के तहत आयोजित कार्यक्रमों के बीच मल्ला महल में हुए आयोजन को लेकर नगर निगम पार्षद वैभव पांडे ने सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई देती है।
पार्षद का कहना है कि पिछले चार वर्षों में नगर निगम अल्मोड़ा को कोई ऐसी ठोस उपलब्धि नहीं मिली, जिसे बेमिसाल कहा जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और आम जनता को आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। खराब सड़कें, कमजोर स्वास्थ्य सेवाएं और रोजमर्रा की समस्याएं लोगों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि शहर की कई पुरानी इमारतें खंडहर में तब्दील हो रही हैं, लेकिन उनकी देखरेख नहीं हो रही है, जिससे अल्मोड़ा की उपेक्षा साफ नजर आती है। पार्षद ने बढ़ती बेरोजगारी और पलायन को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि युवा वर्ग निराश है और इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस प्रयास दिखाई नहीं दे रहे हैं।
जंगली जानवरों, विशेषकर बंदरों के बढ़ते आतंक को भी उन्होंने बड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि इससे आम लोगों और किसानों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा कार्यक्रमों में जनभागीदारी को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि कई बार प्रशासनिक स्तर पर भीड़ जुटाकर कार्यक्रमों को सफल दिखाने का प्रयास किया जाता है।
अंत में उन्होंने कहा कि ‘चार साल बेमिसाल’ जैसे कार्यक्रम अब औपचारिकता बनकर रह गए हैं और मंचों से किए जा रहे दावों के बावजूद धरातल पर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इन चार वर्षों में वास्तव में क्या बदलाव हुआ है और जनता को कब तक केवल घोषणाओं के सहारे रखा जाएगा।

