
प्रमुख सचिव ने कहा- प्रक्रिया नियमों, प्रतिस्पर्धी निविदा और UERC की मंजूरी के आधार पर आगे बढ़ रही
देहरादून। 1320 मेगावाट थर्मल पावर की प्रस्तावित बिजली खरीद प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने तथ्यात्मक स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि बिजली खरीद की प्रक्रिया निर्धारित नियमों, तकनीकी आवश्यकताओं, प्रतिस्पर्धी निविदा और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) की स्वीकृति के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य किसी एक कंपनी को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि राज्य की दीर्घकालिक बिजली आवश्यकता को पूरा करना है।
पांच कंपनियां RFQ चरण में योग्य
प्रमुख सचिव ने बताया कि बिजली खरीद की प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बनाए रखी गई है। Request for Quotation (RFQ) चरण में पांच कंपनियां योग्य पाई गई हैं। इसके बाद Request for Proposal (RFP) प्रक्रिया में भी प्रतिस्पर्धा जारी है। अंतिम चयन प्रतिस्पर्धी बोली के दौरान प्राप्त कुल टैरिफ के आधार पर किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय का वर्ष 2019 का Model Bidding Document सामान्य मॉडल दस्तावेज है। परियोजना की तकनीक, स्थान, ईंधन की उपलब्धता और परिवहन लागत जैसी परिस्थितियों को देखते हुए बोलीदाताओं के सुझावों और आपत्तियों का परीक्षण किया गया। आवश्यक बदलाव UERC के समक्ष रखे गए, जिसके बाद आयोग ने विचार-विमर्श कर उन्हें मंजूरी दी।
देश में किसी भी उपयुक्त स्थान पर संयंत्र का विकल्प
प्रमुख सचिव के अनुसार उत्तराखंड पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील राज्य है और थर्मल पावर प्लांट के लिए बड़ी मात्रा में कोयले की आवश्यकता होती है। लंबी दूरी तक कोयला पहुंचाने से परिवहन लागत बढ़ सकती है। इसी को देखते हुए निविदा में देश में किसी भी उपयुक्त स्थान पर संयंत्र स्थापित करने का विकल्प रखा गया है। हालांकि उत्तराखंड में संयंत्र लगाने पर कोई रोक नहीं है और प्रतिस्पर्धी दर पर बिजली उपलब्ध कराने वाली कंपनी इस प्रक्रिया में भाग ले सकती है।
कुल टैरिफ से तय होगा उपभोक्ताओं पर वित्तीय प्रभाव
डॉ. सुंदरम ने कहा कि बिजली उत्पादन स्थल से उत्तराखंड तक बिजली पहुंचाने की ट्रांसमिशन व्यवस्था और उसकी लागत निविदा तथा टैरिफ की शर्तों के अनुसार तय होगी। इसलिए केवल संयंत्र के दूसरे राज्य में स्थापित होने के आधार पर अतिरिक्त खर्च का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। उपभोक्ताओं पर वास्तविक वित्तीय प्रभाव का आकलन कुल बिजली टैरिफ के आधार पर होगा।
Fixed Charge की सीमा 75 प्रतिशत करने को मंजूरी
उन्होंने बताया कि Model Bidding Document में Fixed Charge की सीमा 70 प्रतिशत थी। बोलीदाताओं की लागत, ईंधन की उपलब्धता और संभावित स्थानों की परिस्थितियों को देखते हुए UPCL ने इसे 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया था, जिससे Fuel Charge को 25 प्रतिशत तक रखने की सुविधा मिल सके। UERC ने जांच और विचार-विमर्श के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।
प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि Fixed Charge की सीमा बढ़ने का अर्थ उपभोक्ताओं पर स्वतः अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ना नहीं है। अंतिम भुगतान प्रतिस्पर्धी बोली से तय होने वाले कुल टैरिफ पर निर्भर करेगा।
पहली यूनिट 42 और दूसरी 48 माह में उपलब्ध कराने का लक्ष्य
राज्य की बिजली आवश्यकता को पूरा करने के लिए 1320 मेगावाट क्षमता को चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने की समयसीमा तय की गई है। पहली यूनिट के लिए 42 माह और दूसरी यूनिट के लिए 48 माह की समयसीमा रखी गई है।
UJVNL-THDC संयुक्त उपक्रम पर भी हुआ था विचार
प्रमुख सचिव ने बताया कि बिजली की आवश्यकता पूरी करने के लिए UJVNL और THDC के संयुक्त उपक्रम के विकल्प पर भी विचार किया गया था। हालांकि THDC, NTPC की सहायक कंपनी है और उसे निर्धारित नीतियों का पालन करना होता है। THDC की मुख्य विशेषज्ञता जल विद्युत और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं में है। अन्य क्षेत्रों में विस्तार के लिए आवश्यक स्वीकृतियां भी जरूरी होती हैं। इन परिस्थितियों में संयुक्त उपक्रम को आगे नहीं बढ़ाया जा सका और इसके बाद प्रतिस्पर्धी निविदा के माध्यम से बिजली खरीद का विकल्प अपनाया गया।
25 वर्षों में संभावित भुगतान का अनुमान
डॉ. सुंदरम ने बताया कि 25 वर्षों के लिए लगभग 1.60 से 1.66 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा एकमुश्त भुगतान नहीं, बल्कि पूरी अवधि में होने वाले संभावित कुल भुगतान का अनुमान है। राज्य की भविष्य की बिजली आवश्यकता का आकलन केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की Resource Adequacy Study के आधार पर किया गया है। वास्तविक भुगतान अंतिम टैरिफ, बिजली आपूर्ति, प्लांट की उपलब्धता और अनुबंध की अन्य शर्तों पर निर्भर करेगा।
UERC की मंजूरी के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया
प्रमुख सचिव ने कहा कि पूरी प्रक्रिया में बोलीदाताओं के सुझावों और आपत्तियों का परीक्षण किया गया तथा RFQ और RFP चरणों में आवश्यक बदलाव UERC के समक्ष रखे गए। स्वतंत्र विद्युत नियामक आयोग के विचार-विमर्श और अनुमोदन के बाद ही संबंधित बदलावों को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि अंतिम चयन भी प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर किया जाएगा।

