
नई दिल्ली (आरएनएस)। केंद्र सरकार ने हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस एक्ट 2025 को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। वित्त मंत्रालय के अनुसार यह कानून एक फरवरी 2026 से देशभर में लागू हो जाएगा। इस अधिनियम का उद्देश्य स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खर्चों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना है। यह विधेयक पहले ही संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है।
अधिसूचना के अनुसार इस अधिनियम के तहत गुटखा, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों पर भारी कर लगाया जाएगा। इस कानून की विशेष बात यह है कि कर निर्धारण वास्तविक उत्पादन के आधार पर नहीं, बल्कि मशीनों की उत्पादन क्षमता के आधार पर किया जाएगा। इसमें पैकिंग मशीनों की सहायता से तैयार किए गए और पाउच में पैक किए जाने वाले चबाने वाले तंबाकू, जर्दा सुगंधित तंबाकू और गुटखा को शामिल किया गया है। इन उत्पादों पर मशीन की क्षमता और पैकेज पर अंकित खुदरा विक्रय मूल्य के आधार पर शुल्क का भुगतान करना होगा।
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पैकिंग मशीनों की संख्या और उनकी उत्पादन क्षमता के अनुसार मासिक देय शुल्क तय किया जाएगा। यह शुल्क प्रत्येक माह की 6 तारीख तक जमा करना अनिवार्य होगा।
सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर लागू जीएसटी दरों का भी पुनर्गठन किया है। इसके तहत 28 प्रतिशत वाली अनुसूची को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। कुछ उत्पादों को 18 प्रतिशत और कुछ को 40 प्रतिशत वाली अनुसूचियों में स्थानांतरित किया गया है। इसके साथ ही चबाने वाले तंबाकू, फिल्टर खैनी, जर्दा सुगंधित तंबाकू और गुटखा जैसे उत्पादों के लिए नई मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई है, जिसमें पैकेज पर घोषित खुदरा बिक्री मूल्य के आधार पर जीएसटी मूल्य तय किया जाएगा।
मंत्रालय के अनुसार नया कानून लागू होने के साथ ही तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर वर्तमान में लगने वाला कंपनसेशन सेस भी समाप्त हो जाएगा। हालांकि नई व्यवस्था के चलते तंबाकू उत्पादों पर कुल कर भार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल अतिरिक्त राजस्व जुटेगा, बल्कि तंबाकू के उपयोग को हतोत्साहित करने में भी मदद मिलेगी।

