ऋषिकेश में साहित्य महाकुंभ का हुआ समापन

हिमालय से खूबसूरत कोई दूसरा स्थान नहीं, हिमालय में करेंगे ‘ऋषि ग्राम’ का निर्माण: बाबा रामदेव

ऋषिकेश। योगगुरु बाबा रामदेव ने कहा कि हिमालय से खूबसूरत कोई स्थान नहीं है। इसलिए अपने गावों और अपनी मातृभूमि की ओर लौटें। उन्होंने हिमालय में ‘ऋषि ग्राम के रूप में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ग्राम के निर्माण की घोषणा की। सोमवार को परमार्थ निकेतन गंगा तट पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन रचना संसार के दूसरे दिन का शुभारंभ योगगुरु बाबा रामदेव ने किया। उन्होंने कहा कि ऐेसे सम्मेलन सनातन संस्कृति के गौरव को प्रतिबिम्बित करते हैं। हम अपनी भाषा से नहीं बल्कि अपने बोध, प्रतिभा और सृजन से बड़े बनें। हिमालय के जल, जंगल, जमीन और जवानी को गौरव प्रदान करना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुये कहा कि जो भी करें पूरी प्रामाणिकता के साथ करें। हमारे कार्यों में समग्रता और पूर्णता होनी चाहिए। योग और कर्मयोग से युक्त जीवन जीये तथा योग मूलक उद्योग करें। हमारी पहचान किसी विद्यालय या कॉलेज से नहीं होती। बल्कि स्वयं के व्यक्तित्व से होती है। हमारी वजह से राष्ट्र का गौरव बढ़े यह जरूरी है। उन्होंने हिमालय को सहेजने का संदेश दिया। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द ने कहा कि शिक्षा और दीक्षा साथ-साथ चले। संस्कार जीवन का सबसे बड़े अलंकार है। नई शिक्षा नीति जीवन नीति है। सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने साहित्य, विज्ञान, प्रकृति, संस्कृति, लोकल से ग्लोबल की यात्रा और आत्मनिर्भर भारत आदि विषयों पर चर्चा की। कहा कि यह आयोजन एक साहित्य कुम्भ है। इस सम्मेलन से आनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से 35 से अधिक देशों के साहित्यप्रेमी जुड़े। कहा कि परमार्थ निकेतन का प्रांगण सृजन का केन्द्र है तथा हमारे विश्वविद्यालय दृष्टि और अनुशासन के केन्द्र हैं।


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