

अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा में पूर्वोत्तर राज्यों के कृषि विज्ञान केंद्रों के विषय विशेषज्ञों के लिए 24 से 28 नवंबर तक “पूर्वोत्तर क्षेत्र के किसानों की आजीविका बढ़ाने हेतु जलवायु–स्मार्ट और सतत कृषि पद्धतियों का उन्नयन” विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा के 16 विशेषज्ञ शामिल हुए। प्रशिक्षण का उद्घाटन 24 नवंबर को संस्थान के प्रभारी निदेशक एन. के. हेडाऊ और अटारी, गुवाहाटी के निदेशक जी. कविदयाल ने किया। उद्घाटन के बाद प्रतिभागियों ने संग्रहालय का भ्रमण किया तथा संस्थान की तकनीकों, एनईएच कार्यक्रम, मोटे अनाज एवं संभावित फसलों की उत्पादन तकनीक, सब्ज़ी उत्पादन, अच्छी कृषि पद्धतियों और प्रायोगिक फार्म का अवलोकन किया। दूसरे दिन एकीकृत रोग और कीट प्रबंधन, उद्यमिता एवं व्यवसाय संवर्धन, किसान सहभागी बीज उत्पादन और मशरूम उत्पादन तकनीक पर विस्तृत सत्र आयोजित हुए। 26 नवंबर को प्रशिक्षणार्थियों ने दरिमा क्लस्टर और आईसीएआर–सीआईटीएच मुक्तेश्वर का शैक्षणिक भ्रमण किया। 27 नवंबर को पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालन प्रबंधन, कृषि यंत्रीकरण, इंजीनियरिंग कार्यशाला भ्रमण, मक्का उत्पादन तकनीक तथा पहाड़ी कृषि में सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर व्याख्यान दिए गए। अंतिम दिन 28 नवंबर को धान और दलहनों की उत्पादन तकनीक, एकीकृत मृदा एवं जल प्रबंधन तथा कृषि में ड्रोन तकनीक के उपयोग पर सत्र आयोजित किए गए। इसके बाद आयोजित समापन समारोह में निदेशक लक्ष्मीकांत ने प्रशिक्षणार्थियों से चर्चा कर फीडबैक लिया और एनईएच क्षेत्र में आईसीएआर–वीपीकेएएस की तकनीकों के प्रसार में केवीके की भूमिका की सराहना की। उन्होंने नवीन तकनीक को आगे बढ़ाने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वयन मनोज कुमार, कामिनी बिष्ट, देवेंद्र शर्मा और एम. एस. भिंडा द्वारा किया गया।

