नेशनल टेक्नोलॉजी डे पर हुआ कार्यशाला का आयोजन

टेक्नोलॉजी को शिक्षा से जोड़ने की जरूरत : नितिका खंडेलवाल

देहरादून। उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के सभागार में नेशनल टेक्नोलॉजी डे पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने टेक्नोलॉजी को शिक्षा से जोड़ने की जरूरत बताई। गुरुवार को कार्यशाला का शुभारंभ यूसैक की निदेशक नितिका खंडेलवाल ने किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रौद्योगिकी मानव के जीवन का अहम हिस्सा बन गई है, उन्होंने टेक्नोलॉजी को शिक्षा से जोड़ने पर अहम जोर देते हुए कहा कि विश्व का नेतृत्व वही, देश करेगा जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में अग्रणी होगा। कहा कि हिमालय के सर्वांगीण विकास एवं पर्यावरण संतुलन के लिए अंतरिक्ष आधारित सूचना तकनीक का महत्वपूर्ण योगदान है, जिसके लिए राज्य में कार्य कर रहे सभी राष्ट्रीय एवं राजकीय संस्थानों को अधिक सामन्जस्य एवं साझा प्रयास करने होंगे। मुख्य वक्ता आईआईआरएस के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हरीश कनार्टक ने जियोइंटेलिजेन्स में इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और इसके उपयोग पर व्याख्यान दिया। उन्होंने आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वर्चुवल रियलिटी, 5जी नेटवर्क, रियल टाईम त्वरित डेटा अधिग्रहण की उपयोगिता मानव के दैनिक जीवन एवं कार्य पद्वति तथा आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों की उपयोगिता पर चर्चा की।
आईआईआरएस की वैज्ञानिक डॉ. क्षमा गुप्ता ने अर्बन माइक्रो क्लाइमेट विषय पर कहा कि पहाड़ों से पलायन होकर लोग शहरों की ओर आ गए हैं, जिससे आबादी तीव्रता से बढ़ गई है, वहीं, दूसरी ओर पहाड़ी नगर खाली हो रहे हैं। हिल टाउन को डेवलप करने की जरूरत है, इसके लिए विकास के इकोनॉमिक मॉडल को बदलने की जरूरत है। यूसैक की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुणा रानी ने रिमोट सेसिंग एवं जीआईएस की ऊर्जा के क्षेत्र में उपयोगिता के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस मौके पर केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. सुषमा गैरोला, वैज्ञानिक डॉ. प्रियदर्शी उपाध्याय, डॉ. नीलम रावत, डॉ. आशा थपलियाल, डॉ. गजेंद्र सिंह, शशांक लिंगवाल, पुष्कर कुमार, डॉ. दिव्या उनियाल, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी आरएस मेहता, प्रशासनिक सलाहकार प्रदीप रावत, सिस्टम मैनेजर हेमंत बिष्ट, नवीन चंद्र, विवेक तिवारी, सोनम बहुगुणा आदि उपस्थित थे।


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