नगर निगम के खिलाफ कोर्ट में जाना नगर हित में नहीं

श्रीनगर गढ़वाल। सरकार की ओर से नगर पालिका को नगर निगम का दर्जा दिए जाने को पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मोहन लाल जैन और पूर्व राज्यमंत्री अतर सिंह असवाल ने समय के साथ ही विकास के लिए जरूरी कदम बताया। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने श्रीनगर को नगर निगम का दर्जा दे दिया था तो नगर पालिका अध्यक्ष को इसके खिलाफ कोर्ट में नहीं जाना चाहिए था। कहा इससे नगर का विकास बुरी तरह से प्रभावित हो गया है।
रविवार को संयुक्त रूप से पत्रकारों से बातचीत में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मोहन लाल जैन व पूर्व राज्य मंत्री अतर सिंह असवाल ने कहा कि नगर निगम के खिलाफ पालिका अध्यक्ष का न्यायालय में याचिका दाखिल करना नगर के हित में नहीं है। इससे पहले भी देहरादून, मेरठ आदि नगर पलिकाओं को नगर निगम बनाया गया। लेकिन कोई भी अध्यक्ष न्यायालय की शरण में नहीं गया। वर्तमान में नगर का विकास अवरूद्ध हो चुका है। न तो नगर पालिका काम कर रही है और न ही नगर निगम। जिसका भुगतभोगी आम जनता को बनना पड़ रहा है। दोनों नेताओं ने कहा कि अगर नगर निगम नहीं बना तो श्रीनगर का दुर्भाग्य होगा। उन्होंने कहा कि पालिका को नगर निगम बनाए जाने के बाद 100 करोड़ का बजट मिलना था। लेकिन वह भी विवाद के कारण नहीं मिल पाया है। जिस कारण नगर का विकास ठप पड़ चुका है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को नगर निगम के खिलाफ न्यायालय की शरण में न जाकर जनता के बीच जाना चाहिए था। इस बात का स्वयं जनता फैसला करती। लेकिन कांग्रेस ने ऐसा न कर नगर का विकास अवरूद्ध कर दिया है। उन्होंने कहा कि अभी भी कांग्रेस को जनहित में न्यायालय में दायर रिट को वापस लेकर जनता के बीच जाना चाहिए और विधानसभा चुनाव के परिणामों पर भी विचार करना चाहिए। इस मौके पर व्यापार सभा अध्यक्ष दिनेश असवाल, कुशलानाथ, विपिन थपलियाल, विनय घिल्डियाल, देवेंद्रमणी मिश्रा व गणेश भट्ट आदि मौजूद रहे।


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