
अल्मोड़ा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान अल्मोड़ा में माध्यमिक विद्यालयों के भूगोल प्रवक्ताओं के लिए आयोजित पांच दिवसीय “भौगोलिक सूचना तंत्र (जीआईएस) के तकनीकी ज्ञान की जागरूकता” कार्यशाला का समापन किया गया। समापन सत्र के मुख्य अतिथि मानसखंड विज्ञान केंद्र के प्रभारी और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नवीन चन्द्र जोशी ने कहा कि विद्यालयी शिक्षा में भूगोल के प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम के प्रभावी शिक्षण के लिए जीआईएस तकनीक का ज्ञान अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होंगी। मुख्य संदर्भदाता यूकॉस्ट के तकनीकी सलाहकार और सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के विजिटिंग प्रोफेसर जीवन सिंह रावत ने उत्तराखंड में जीआईएस तकनीक के इतिहास, विकास और इसके शैक्षणिक महत्व पर प्रकाश डाला। संदर्भदाता के रूप में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर नरेश पंत ने कार्यशाला के आयोजन की सराहना की और कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार की तकनीकी कार्यशालाएं जारी रहनी चाहिए। कार्यशाला के समन्वयक रमेश सिंह रावत, भूगोल प्रवक्ता, डायट अल्मोड़ा, ने कार्यशाला के उद्देश्य, संरचना और उपयोगिता के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने कंप्यूटर प्रयोगशाला में जीआईएस आधारित मानचित्र निर्माण से जुड़े प्रोजेक्टों का प्रदर्शन भी किया। कार्यशाला का संचालन रमेश सिंह रावत ने किया। अध्यक्षता करते हुए संस्थान के प्राचार्य ललित मोहन पांडे ने सभी प्रतिभागियों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया और कार्यशाला के सफल आयोजन की सराहना की। इस अवसर पर नियोजन एवं प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष हेम चन्द्र जोशी और सेवापूर्व विभाग के प्रवक्ता हरवंश सिंह बिष्ट ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में उमेश चन्द्र मिश्रा सहित अल्मोड़ा जनपद के भूगोल प्रवक्ता और डीएल प्रशिक्षु उपस्थित रहे।

