
अल्मोड़ा। दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में इंटरनेट और नेटवर्क की कमी के बीच शिक्षा को लेकर एक सकारात्मक पहल सामने आई है। ताड़ीखेत विकासखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय मटीला धूरा में प्रधानाध्यापक भास्कर जोशी ने एआई आधारित ऑफलाइन शिक्षा का मॉडल विकसित कर नई मिसाल पेश की है। कोरोना काल के दौरान जब पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम पर निर्भर हो गई थी, तब इस क्षेत्र के अधिकांश छात्र इंटरनेट सुविधा के अभाव में शिक्षा से वंचित हो रहे थे। इस समस्या को देखते हुए भास्कर जोशी ने ऐसे मोबाइल एप विकसित किए, जो बिना इंटरनेट के भी संचालित हो सकते हैं और बच्चों को पढ़ाई में मदद करते हैं। उन्होंने “बजेला ऑनलाइन एजुकेशन” सहित कई एप तैयार किए, जिनके माध्यम से छात्र सवालों के जवाब देकर तुरंत परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। इन एप में क्विज, भाषा सीखने और बुनियादी शिक्षा से जुड़े विभिन्न फीचर शामिल हैं। खास बात यह है कि ये सभी एप बिना नेटवर्क के भी काम करते हैं, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को बड़ी राहत मिली है। विद्यालय में इन तकनीकों के माध्यम से बच्चों को सिर्फ सामान्य पढ़ाई ही नहीं, बल्कि ड्रोन संचालन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स जैसे आधुनिक विषयों से भी परिचित कराया जा रहा है। इससे छात्रों में तकनीकी समझ विकसित हो रही है और उनकी रुचि भी बढ़ रही है। भास्कर जोशी के इन प्रयासों को मान्यता भी मिली है। उन्हें गूगल सर्टिफाइड एजुकेटर का दर्जा प्राप्त हुआ है, जिससे उनकी पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। विद्यालय की छात्रा निकिता बिष्ट सहित अन्य बच्चों का कहना है कि अब वे मोबाइल फोन का उपयोग केवल मनोरंजन के बजाय पढ़ाई के लिए भी कर रहे हैं। इससे उनके सीखने के तरीके में बदलाव आया है और आत्मविश्वास बढ़ा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रवि मेहता ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के नवाचार दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। भास्कर जोशी का लक्ष्य है कि यह मॉडल केवल उनके विद्यालय तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के अन्य दुर्गम क्षेत्रों तक भी पहुंचे, ताकि हर बच्चे को तकनीक के माध्यम से बेहतर शिक्षा मिल सके।



