
चम्पावत। मानसून सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में नदियों का जल स्तर भी लगातार बढ़ रहा है। बरसात तेज होने पर नदियों के साथ-साथ बरसाती नाले भी पूरे उफान में होंगे। लेकिन बाढ़ से सुरक्षा के लिए विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। विभागों की लेटलतीफी मैदानी क्षेत्रों में साफ देखने को मिल रही है। गैड़ाखाली, थ्वालखेड़ा, बूम, उचौलीगोठ, खेतखेड़ा, सैलानीगोठ, छीनीगोठ आदि गांवों को हर साल बरसाती नाले से होने वाले नुकसान का सामना करना पड़ता है। तटबंध न बनने के कारण बरसाती नाले का पानी इनके घरों, खेतों में घुसकर तबाही मचा देता है। जिसकी मार ग्रामीणों को झेलनी पड़ती है। बावजूद इसके इन गांवो को नुकसान से बचाने के लिए अभी तक विभागीय स्तर से कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। हालांकि इस्टीमेट भेजने के बावजूद कई प्रस्ताव शासन में लंबित हैं। सिंचाई विभाग के एसडीओ विजय पाल सिंह ने बताया कि कई योजनाओं का प्रस्ताव बनाकर शासन स्तर पर भेज दिए गए हैं। आगे की कार्रवाई करने के लिए शासन स्तर से वित्तीय स्वीकृति मिलनी बाकि है। जैसे ही यह स्वीकृति मिल जाएगी इनके निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।


