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प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का किया ऐलान

RNS INDIA NEWS 19/11/2021
modi

पीएम मोदी ने देश के नाम संबोधन में कहा- अगले संसद सत्र में पूरी कर देंगे कानूनी प्रक्रिया

नई दिल्ली। शुक्रवार को देश के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बहुत बड़ी घोषणा करते हुए तीन कृषि कानूनों को वापस ले लिया। गुरुपर्व के मौके पर देश को संबोधित कर रहे पीएम ने कृषि कानूनों को वापस लिए जाने का फैसला सुनाया। यह घोषणा तब आई है, जब इन कानूनों के खिलाफ देश के किसानों का एक समूह पिछले एक साल से आंदोलन कर रहा है। दिल्ली के बॉर्डर से लेकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले एक सालों में कई स्तर और चरणों में किसानों का आंदोलन देखा गया है। वहीं, अब उत्तराखंड, यूपी सहित पांच राज्यों में अगले साल चुनाव हैं। मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक तो कई बार चेतावनी दे चुके थे कि यदि समय रहते ये कानून वापस नहीं लिया तो आगामी चुनावों में भाजपा को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। वहीं, उत्तराखंड में कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया। वहीं किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा।


कोशिशों के बावजूद हम कुछ किसानों को समझा नहीं पाए:  

प्रधानमंत्री ने आज अपने संबोधन में कहा कि हम तीन नए कानून लाए गए थे। मकसद था छोटे किसानों को और ताकत मिले। वर्षों से इसकी मांग हो रही थी। पहले भी कई सरकारों ने इन पर मंथन किया था। इस बार भी संसद में चर्चा हुई मंथन हुआ और यह कानून लाए गए। देश के कोने कोने में कोटि-कोटि किसानों ने अनेक किसान संगठनों ने इसका स्वागत किया समर्थन किया। मैं आज उन सभी का उन सभी का बहुत आभारी हूं, धन्यवाद करना चाहता हूं।
इन कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा करने से ठीक पहले पीएम ने कुछ यूं अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कोशिशों के बावजूद हम कुछ किसानों को समझा नहीं पाए, भले ही किसानों का एक वर्ग ही विरोध कर रहा था। हम उन्हें अनेकों माध्यमों से समझाते रहे। बातचीत होती रही। हमने किसानों की बातों को तर्क को समझने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। हमने 2 साल तक इन नए कानूनों को सस्पेंड करने की भी बात की। आज देशवासियों से क्षमा मांगते हुए पवित्र हृदय से कहना चाहता हूं कि शायद हमारी तपस्या में कोई कमी रही होगी, जिसके कारण दिए के प्रकाश जैसा सत्य कुछ किसान भाइयों को हम समझा नहीं पाए। हमने इन तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला किया है। पीएम ने कहा कि संसद के इसी शीतकालीन सत्र में सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की प्रक्रिया पूरा कर देगी। यानी कि इस शीतकालीन सत्र में ये कानून आधिकारिक तौर पर हटा लिए जाएंगे।


बता दें कि मोदी सरकार ने इन कानूनों को जून, 2020 में सबसे पहले अध्यादेश के तौर पर लागू किया था। इस अध्यादेश का पंजाब में तभी विरोध शुरू हो गया था। इसके बाद सितंबर के मॉनसून सत्र में इस पर बिल संसद के दोनों सदनों में पास कर दिया गया। किसानों का विरोध और तेज हो गया। हालांकि इसके बावजूद सरकार इसे राष्ट्रपति के पास ले गई और उनके हस्ताक्षर के साथ ही ये बिल कानून बन गए। तब से पंजाब-हरियाणा से शुरू हुआ किसान आंदोलन 26 नवंबर तक दिल्ली की सीमा पर पहुंच गया और आज तक यहां कई जगहों पर किसान मौजूद हैं और आंदोलन बड़ा रूप ले चुका है।

राकेश टिकैत बोले-तत्काल वापस नहीं होगा आंदोलन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रकाश पर्व के मौके पर राष्‍ट्र के नाम संबोधन में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान करके हर किसी को चौंका दिया। उन्‍होंने अपने संबोधन में आंदोलन खत्‍म कर किसानों को घर लौटने की अपील की है। उन्‍होंने कहा कि किसान अपने खेत में लौटें, अपने परिवार के बीच लौटें। हालांकि किसान नेता राकेश टिकैत ने स्‍पष्‍ट कर दिया है कि किसान आंदोलन तत्‍काल वापस नहीं होगा। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्‍ता टिकैत ने एक ट्वीट में यह बात कही। उन्‍होंने ट्वीट में लिखा कि-आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा। सरकार न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य के साथ-साथ किसानों के दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करे।

पूर्व सीएम हरीश रावत ने किसानों को दी बधाई: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस चुनाव संचालन अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत ने किसानों को बधाई दी और इसे लोकतंत्र की जीत बताया। पूर्व सीएम हरीश रावत भी कृषि कानून को लेकर पहले से ही भाजपा सरकार पर हमलावर रहे। उन्होंने इस फैसले पर खुशी जताई। पूर्व सीएम ने इंटरनेट पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि- अहंकार से चूर सत्ता ने उन तीन काले कानून, जो किसानों का गला घोंट रहे थे, उन्हें वापस ले लिया है। ये किसान भाइयों की जीत है। उन एक हजार के करीब शहीदों की जीत है, जिन्होंने अपने प्राण दिए, ताकि उनको जीत हासिल हो। उन्होंने किसानों को इस जीत के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा हम इसे लोकतंत्र की जीत मानते हैं, क्योंकि सत्ता का अहंकार जनता के संघर्ष के सामने झुका है।

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