

देहरादून। छह वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता बच्ची को कोरोनेशन और दून अस्पताल के बीच इलाज के लिए भटकाने के मामले में शासन ने सख्त रुख अपनाया है। सचिव विनय शंकर पांडेय के निर्देश पर चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने मामले की जांच शुरू कर दी है। दोनों अस्पतालों से संबंधित डॉक्टरों के बयान दर्ज कर रिपोर्ट मांगी गई है। जांच के दायरे में करीब सात डॉक्टर आ सकते हैं। वहीं, मामला राज्यपाल और मानवाधिकार आयोग तक भी पहुंच गया है।
चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने कोरोनेशन अस्पताल के पीएमएस डॉ. यतेंद्र सिंह तथा दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट से संबंधित डॉक्टरों के लिखित बयान लेकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मामले में पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की अनुपलब्धता के चलते कोरोनेशन अस्पताल से बच्ची को दून अस्पताल रेफर किया गया था। दून अस्पताल में करीब चार घंटे तक प्रक्रिया चलने के बाद बच्ची को वापस भेज दिया गया। इस घटनाक्रम ने दोनों अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन ने भी इलाज और मेडिकल परीक्षण में हुई देरी पर नाराजगी जताई है।
चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने कहा कि इतने संवेदनशील मामले में इलाज और मेडिकल परीक्षण में देरी होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। दोनों अस्पतालों से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच वरिष्ठ मानवाधिकार एवं आरटीआई कार्यकर्ता भूपेंद्र कुमार लक्ष्मी ने मामले की शिकायत राज्यपाल, मुख्य सचिव और मानवाधिकार आयोग से की है। उन्होंने प्रकरण की गहन जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
शासन ने दोनों अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि भर्ती और रेफर किए जाने वाले मरीजों की दैनिक रिपोर्ट हर शाम चिकित्सा शिक्षा निदेशालय और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजी जाए। निदेशालय इस संबंध में शासन को रिपोर्ट उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा मेडिकोलीगल और सड़क दुर्घटना से संबंधित मामलों को मेडलीपर पोर्टल पर 24 घंटे के भीतर दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।
कोरोनेशन अस्पताल के पीएमएस डॉ. यतेंद्र सिंह के अनुसार, पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्ची को दून अस्पताल रेफर किया गया था। वहीं, दून अस्पताल के एमएस डॉ. आरएस बिष्ट ने बताया कि डॉक्टरों ने बच्ची की जांच की थी, लेकिन परिजनों के एनेस्थीसिया के लिए तैयार नहीं होने के कारण सामान्य जांच रिपोर्ट तैयार कर उसे वापस भेजा गया। अब शासन की नाराजगी के बाद पूरे मामले की जांच की जा रही है।



