

अल्मोड़ा(आरएनएस)। नगर के खत्याड़ी में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के आठवें दिन बुधवार को भगवान शिव के विवाह प्रसंग का वर्णन किया गया। शिव उपासक कमल शिव योगी ने शिव बारात का मनोहारी वर्णन किया तो पूरा कथा पंडाल शिव के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु शिव विवाह का प्रसंग सुनकर भाव-विभोर हो गए। कथा के दौरान शिव योगी ने बताया कि भगवान शिव की बारात में भूत-प्रेत, गण-गंधर्व और देवता नृत्य करते हुए शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि भगवान शिव साधारण वर नहीं, बल्कि सृष्टि के संहारक और पालक हैं। माता पार्वती के साथ उनका विवाह यह संदेश देता है कि शिव और शक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों का अस्तित्व एक-दूसरे के बिना अधूरा है। कथा के मुख्य प्रसंग में शिव योगी ने पाशुपत और भैरव पूजन विधि का महत्व बताते हुए कहा कि कलियुग में भगवान शिव की आराधना और उपासना कल्याण का मार्ग है। उन्होंने कहा कि लोग छोटी-छोटी परेशानियों से घबराकर गलत रास्ते अपना लेते हैं, जबकि नियमित पूजा और साधना से मन को शांति और संकटों का सामना करने की शक्ति मिलती है। उन्होंने पाशुपत पर्व और भैरव पूजन विधि को शिव साधना का महत्वपूर्ण अंग बताया। इस दौरान शिव योगी ने भक्ति के साथ शारीरिक स्वास्थ्य और पीड़ित मानवता की सेवा को भी आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि वे वर्षों से जरूरतमंदों की सेवा के प्रयास में जुटे हैं और कैंसर, शुगर व किडनी रोग जैसी समस्याओं के लिए हिमालयी जड़ी-बूटियों से तैयार आयुर्वेदिक औषधियां जरूरतमंदों को उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने इसे आयुर्वेद और शिव आराधना के समन्वय से किया जा रहा सेवा प्रयास बताया। यजमान शैलेंद्र साह सोबू ने बताया कि पांच नवंबर, गुरुवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करने की अपील की। कथा में मुख्य यजमान कैलाश साह, रेखा साह, मीनू साह, अंकित, हर्ष साह, प्रदीप, राकेश साह और ऋतिक साह सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे।




