


देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू से जुड़ा पारिवारिक विवाद फिर सुर्खियों में है। सोमेश्वर विधायक और महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत देकर पहली शादी की बात छिपाकर विवाह करने, शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न, मारपीट, जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। शिकायत में एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए उन्होंने खुद और अपने नाबालिग बच्चों की हत्या की साजिश की आशंका भी जताई है। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
करीब 22 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते से जुड़ा यह विवाद सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। गिरधारी लाल साहू से जुड़े पारिवारिक विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। जनवरी 2022 में उन्होंने रिंकू साहू को अपना पुत्र बताया था। रिंकू के बरेली में साहू समाज की राजनीति से जुड़े होने की भी चर्चा रही है।
सितंबर 2024 में गिरधारी लाल साहू का नाम एक अन्य विवाद में सामने आया था। उस समय रेखा आर्य ने आरोप लगाया था कि कल्पना मिश्रा नाम की महिला ने आधार कार्ड और पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों में गिरधारी लाल साहू को अपना पति बताया है। इस मामले में पुलिस में शिकायत और जांच शुरू होने की खबरें आई थीं। इससे पहले किडनी दान से जुड़े एक विवाद में भी गिरधारी लाल साहू का नाम सामने आया था। उस प्रकरण में वैजयंती माला को उनकी पहली पत्नी बताया गया था और नरेश चंद्र गंगवार ने किडनी निकाले जाने को लेकर शिकायत की थी।
रेखा आर्य की शिकायत से ठीक एक दिन पहले हल्द्वानी के कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने भी अपनी और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। प्रेसवार्ता में उन्होंने फोन टैपिंग और हैकिंग की आशंका व्यक्त करते हुए पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया था। इस दौरान वह भावुक हो गए थे और गैरसैंण सत्र के दौरान आत्मदाह की चेतावनी भी दी थी।
एक ओर कांग्रेस विधायक सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ दल की वरिष्ठ मंत्री की शिकायत ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए इन घटनाक्रमों के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। अब रेखा आर्य की शिकायत पर पुलिस की कार्रवाई, कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग की सत्यता और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान अहम होंगे।




