
चमोली। जय मां नंदा के जयकारों और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच बुधवार को कुरुड़ और बंड क्षेत्र की मां नंदा की डोलियां विधि-विधान से सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में विराजमान हो गईं। इसके साथ ही मां नंदा की 19 दिन की बड़ी जात का निर्विघ्न समापन हो गया। विभिन्न पड़ावों से होते हुए डोलियां कैलाश के लिए रवाना हुईं और वापसी पर क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा। इस दौरान 12 साल बाद फिर बड़ी जात के आयोजन का संकल्प लिया गया।
फरखेत गांव के बाद विभिन्न पड़ावों से होते हुए मां नंदा की डोलियां बुधवार अपराह्न करीब साढ़े तीन बजे कुरुड़ मंदिर परिसर पहुंचीं। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। डोलियों के मंदिर पहुंचने पर कुरुड़ बाजार और मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया। डोली के मुख्य पुजारी मुंशी चंद्र गौड़ सहित अन्य ब्राह्मणों ने मां नंदा का पूजन और हवन कराया। इस दौरान 12 साल बाद फिर बड़ी जात के आयोजन का संकल्प लिया गया। इस मौके पर महिपाल सिंह रावत, भगवती प्रसाद, हरि प्रसाद, सत्य प्रसाद, सुरेंद्र सिंह, रमेश गौड़, महिला मंगल दल अध्यक्ष देवेश्वरी देवी सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे।
मां नंदा की बड़ी जात का आयोजन पांच से 23 सितंबर तक हुआ। आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय लोगों और हक-हकूकधारियों का विशेष सहयोग रहा। बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल (सेनि.) हरेंद्र सिंह रावत और कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला ने कहा कि श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के सहयोग से पहली बार इतने बड़े अनुष्ठान को निर्विघ्न संपन्न कराया गया। ग्रामीणों ने बिना सरकारी संसाधनों के श्रद्धालुओं और यात्रियों की सेवा की। क्षतिग्रस्त रास्तों और गाड़-गदेरों को पार करते हुए मां नंदा की डोलियों को होमकुंड तक पहुंचाया गया। वेदनी बुग्याल से होमकुंड और फिर कुरुड़ मंदिर तक मौसम भी अनुकूल रहा।
बड़ी जात के दौरान स्वामी विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय की ओर से निर्जन पड़ावों में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए। इस दौरान 2283 श्रद्धालुओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवा वितरित की गई, जबकि 50 से अधिक श्रद्धालुओं को ऑक्सीजन की सुविधा दी गई। शिविर में डॉ. सुशील बलूनी, फार्मासिस्ट ताजवीर सती, दीपक पंत, आदित्य शाह, अशोक गौड़ और लक्ष्मण आदि मौजूद रहे।
