
पिथौरागढ़(आरएनएस)। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र हैदराबाद में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रदेश के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति का शानदार प्रदर्शन किया।
बुधवार के कार्यशाला में हिस्सा लेकर वापस सीमांत लौटे प्रवक्ता बसंत गिरी ने बताया कि हैदराबाद में 7 से 16 सितंबर के बीच हमारी सांस्कृतिक विविधता विषय पर आधारित राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिसमें देश के 14 राज्यों से आए शिक्षक-शिक्षिकाओं ने हिस्सा लिया। सीमांत से एकमात्र उन्होंने और प्रदेश के अन्य जिलों के कुल दस शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया। बताया कि दस दिन तक चले कार्यशाला के दौरान उत्तराखंड के शिक्षकों ने अपनी लोक कला, लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से राज्य की आकर्षक, जीवंत एवं अनूठी सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत किया।
उत्तराखंड की पारंपरिक लोक वेशभूषा एवं विशेष रूप से रंगीन पिछौड़ा पहने शिक्षिकाओं की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। बताया कि झोड़ा, चांचरी और जागर की प्रस्तुती को भी कार्यशाला में खूब सराहा गया। बसंत गिरी ने बताया कि कार्यशाला में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने प्रतिभागी शिक्षकों को कथक, शिक्षा में कला का समावेश, विभिन्न भारतीय भाषाओं के प्रसिद्ध लोकगीत एवं अन्य सांस्कृतिक विषयों पर प्रशिक्षण एवं जानकारी भी प्रदान की।
