
अल्मोड़ा। पशुपालन विभाग के राजकीय चारा प्रक्षेत्र भैंसवाड़ा में विभिन्न बहुवर्षीय घासों का उत्पादन कर पशुपालकों को निर्धारित दरों पर बीज और जड़-सर्पण (रूटस्टॉक) उपलब्ध कराया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य पशुपालकों को वर्षभर गुणवत्तापूर्ण हरा चारा उपलब्ध कराकर दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को बढ़ावा देना है। राजकीय चारा प्रक्षेत्र भैंसवाड़ा की वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दीपाली लालवानी ने बताया कि प्रक्षेत्र में गुच्छी घास, दोलनी घास, सीता घास, गुणी घास तथा संकर नैपियर घास का उत्पादन किया जाता है। इच्छुक पशुपालक इन घासों के बीज एवं जड़-सर्पण निर्धारित शुल्क पर प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि गुच्छी और दोलनी घास शीतोष्ण जलवायु की घासें हैं, जिनकी बुवाई समुद्र तल से 1200 से 2500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अक्टूबर से जनवरी तथा वर्षा ऋतु में जुलाई-अगस्त के दौरान की जाती है। इन घासों में 8.6 से 11.8 प्रतिशत तक प्रोटीन तथा 70 से 76 प्रतिशत तक पाचकता पाई जाती है। डॉ. लालवानी ने बताया कि सीता और गुणी घास की बुवाई 800 से 1650 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मई से अगस्त के बीच की जाती है। इन घासों से वर्ष में तीन से चार बार कटाई कर करीब पांच क्विंटल हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है। इनकी पाचकता 70 से 76 प्रतिशत तक होती है। उन्होंने बताया कि संकर नैपियर घास उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु के लिए उपयुक्त है। इसकी रोपाई समुद्र तल से 500 से 1500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जुलाई-अगस्त के दौरान तने की कलम अथवा जड़-सर्पण से की जाती है। उन्होंने पशुपालकों से उन्नत घासों का उपयोग कर पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने की अपील की।


