

रुद्रप्रयाग(आरएनएस)। ग्रामीण क्षेत्रों में एक ओर गुलदार भालू से जान बचाने का खतरा तो दूसरी ओर बंदर, सूअर और लंगूर ने पूरी खेती तबाह कर दी है जिससे यहां के लोगों के मन में यहां से पलायन करने के विचार पैदा होने लगे हैं। सरकार जंगली जानवरों के मामलों में यदि सख्त कार्यवाही नहीं करती है तो ग्रामीण भूख हड़ताल करने को मजबूर होंगे। चोपड़ा क्षेत्र के वयोवृद्ध मोतीराम पुरोहित ने कहा कि गांवों में जानवरों का आतंक जीने नहीं दे रहा है। चोपड़ा, जोंदला, पाली, कुरझण, इन्द्रनगर, क्वीली, कोटि, मदोला आदि गांवों में बीते लम्बे समय से सूअर, बंदर, लंगूर ने खेती बुरी तरह तबाह कर दी है। वहीं गुलदार का निरंतर डर बना है। एक ओर खेतों में जाने से लोग भयभीत हो रहे है वहीं खेतों में लहलहाती फसल बंदर और सूअर तबाह कर रहे हैं। जो भी खेतों में सब्जी, दाल और अन्य फंसलें हैं उन्हें जानवर नष्ट कर रहे हैं जबकि पारंपरिक खेती को भी तबाह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में बंदर, सूअर, भालू और गुलदार कभी नहीं देखे हैं। बंदरों को तो कहीं से गांवों की सीमाओं में छोड़ा जा रहा है। जो खेती को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर कृषि मंत्री पलायन रोकने के लिए खेती को बढ़ावा देने की बात कर रहे है वहीं जंगली जानवरों से निजात नहीं दिलवा पा रहे हैं। मोतीराम पुरोहित ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र जंगली जानवरों से सरकार ने निजात नहीं दिलाई तो वे ग्रामीणों के साथ भूख हड़ताल करने को मजबूर होंगे।

