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  • देहरादून

वन अधिकार मामले में मजबूत पैरवी की मांग

RNS INDIA NEWS 31/03/2025
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देहरादून(आरएनएस)।   वन अधिकार 2006 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दो अप्रैल को होने वाली सुनवाई में मजबूत पक्ष रखने की मांग को लेकर जन संगठनों और विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र भेजा है। जिसमें ये भी कहा गया है कि अगर सरकार ने इसमें जनता का सही पक्ष नहीं रखा तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। पत्र में कहा गया है कि इस कानून का लाभ पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्र के लगभग सारे उत्तराखंडियों को मिलना चाहिए था। लेकिन प्रशासन और खास तौर पर वन विभाग इसको कमज़ोर करने की और इसके बारे में गलत जानकारी फ़ैलाने में लगातार लगे हैं। जिसकी वजह से आज तक उत्तराखंड की जनता अपने हक़ों से वंचित हैं। करीब दो लाख लोग इससे प्रभावित हैं। ये भी कहा गया है कि इसमतें गांववासियों से अनुमति लेने के बिना वन ज़मीन और वन संसाधनों को बेचा जाता है, जबकि ये गलत है। लोगों को अतिक्रमणकारी कह कर बेदखल किया जा रहा है। ये भी कहा गया है कि इस मामले में राज्य में आज तक एक ही गांव को अधिकार पत्र मिला है। इस कानून के अंतर्गत नैनीताल ज़िले के बिन्दुखत्ता गांव को राजस्व गांव का दर्जा मिलने का फैसला भी हुआ है। लेकिन सरकार इस निर्णय पर अमल करने के लिए तैयार नहीं हो रही है। फरवरी 2019 में सरकार ने पक्ष रखने में इतनी लापरवाही की कि उच्चतम न्यायालय ने 17 लाख दावेदार परिवारों को बेदखली करने के आदेश दिया था, जिनमें से कई उत्तराखंड के भी थे । देश भर में आंदोलन होने की वजह से केंद्र सरकार को मानना पड़ा कि इस कानून के अमल में गैर क़ानूनी कृत्य हुए हैं। इसकी वजह से कोर्ट ने अपने आदेश को स्थगित कर दिया। अब इस मामले पर सुनवाई होनी है। जिसमतें सरकार अगर फिर कमजोर पक्ष रखती है तो दो लाख लोगों के हक हकूक छिन सकते हैं।
पत्र भेजने वालों में वन पंचायत संघर्ष मोर्चा से तरुण जोशी, उत्तराखंड लोक वाहिनी से राजीव लोचन साह, राष्ट्रीय कौंसिल सदस्य भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी समर भंडारी, राष्ट्रीय सचिव समाजवादी पार्टी डॉ एसएन सचान, समाजवादी लोक मंच से मुनीश कुमार, चेतना आंदोलन से शंकर गोपाल एवं विनोद बडोनी, महिला किसान अधिकार मंच से हीरा जंगपांगी,उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी से नरेश नौडियाल एवं दिनेश उपाध्याय सहित कई लोग शामिल थे।

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